जिला ब्यूरो चीफ बबलू जायसवाल
खरीफ सीजन से पहले प्रशासन की बड़ी कार्रवाई, कृषि आदानों की गुणवत्ता जांचने पहुंचा उड़नदस्ता दल
मनेन्द्रगढ़। खरीफ सीजन के दौरान किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज और कृषि आदान उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने केल्हारी क्षेत्र में व्यापक जांच अभियान चलाया। कलेक्टर के निर्देश पर कृषि एवं राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने शनिवार को बीज और कीटनाशक विक्रेताओं के प्रतिष्ठानों पर औचक निरीक्षण कर कई गंभीर अनियमितताओं का खुलासा किया। कार्रवाई के दौरान अवैध भंडारण, बिना दस्तावेज बीज पैकेजिंग, एक्सपायरी कीटनाशकों का भंडारण तथा नियमों के उल्लंघन के मामले सामने आए, जिसके बाद संबंधित प्रतिष्ठानों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
एफपीओ में मिला बिना अनुमति बीज पैकेजिंग का खेल
निरीक्षण के दौरान केल्हारी फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड (सेमरिया) में अधिकारियों को कई गंभीर खामियां मिलीं। जांच टीम को न तो स्टॉक रजिस्टर उपलब्ध कराया गया और न ही बीज परीक्षण रिपोर्ट अथवा पैकेजिंग संबंधी वैध दस्तावेज प्रस्तुत किए गए। मौके पर बड़ी मात्रा में धान एवं सरसों के बीजों की पैकेजिंग और भंडारण पाया गया, जिसे प्रथम दृष्टया नियमों के विपरीत माना गया।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अधिकारियों ने 168 बोरी, लगभग 71.40 क्विंटल बीजों के विक्रय पर तत्काल रोक लगाते हुए उन्हें जब्त कर लिया तथा संस्था से तीन दिवस के भीतर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने को कहा है।
कीटनाशक दुकानों में भी उजागर हुई लापरवाही
जांच दल ने क्षेत्र के कई कृषि केंद्रों और कीटनाशक विक्रेताओं की भी जांच की। निरीक्षण में बिना वैध स्रोत के कीटनाशकों का भंडारण, किसानों को निर्धारित प्रारूप में बिल जारी नहीं करना, स्टॉक एवं मूल्य सूची का अभाव तथा बिना लेबल और पैकिंग वाले उत्पादों का भंडारण जैसी अनियमितताएं सामने आईं।
सबसे चिंताजनक तथ्य यह रहा कि कुछ प्रतिष्ठानों में अवसान अवधि पार कर चुकी कीटनाशक दवाएं भी रखी गई थीं, जिनका विक्रय किसानों के हितों के लिए गंभीर खतरा माना गया है। इसके अलावा कीटनाशकों के साथ खाद्य सामग्री का भंडारण भी पाया गया, जो सुरक्षा मानकों के विपरीत है।
तीन दिन में जवाब नहीं तो होगी कड़ी कार्रवाई
कृषि विभाग ने संबंधित मामलों को कीटनाशी अधिनियम 1968, कीटनाशी नियम 1971 तथा बीज नियंत्रण आदेश 1983 के उल्लंघन की श्रेणी में माना है। सभी संबंधित प्रतिष्ठानों को तीन दिवस के भीतर आवश्यक दस्तावेजों सहित जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने की स्थिति में लाइसेंस निरस्तीकरण, जब्ती की कार्रवाई और वैधानिक प्रकरण दर्ज करने जैसी कठोर कार्रवाई की जाएगी।
संयुक्त टीम ने की कार्रवाई
निरीक्षण अभियान में सहायक भूमि संरक्षण अधिकारी एवं नोडल अधिकारी महेश पैकरा, सहायक संचालक कृषि जयंत पैकरा, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी रवि गुप्ता, बीज निरीक्षक जितेंद्र झा, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी ओमप्रकाश श्रीवास सहित राजस्व विभाग से तहसीलदार सतरूपा साहू, राजस्व निरीक्षक रामप्रताप सिंह एवं पटवारी सरस्वती गुप्ता शामिल रहे।
प्रशासन की इस कार्रवाई को किसानों के हितों की सुरक्षा और नकली-अमानक कृषि आदानों पर अंकुश लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

