जिला ब्यूरो बबलू जायसवाल मनेन्द्रगढ़। क्षेत्र के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान Delhi World Public School में विद्यार्थियों की बौद्धिक क्षमता और रचनात्मक अभिव्यक्ति को प्रोत्साहित करने हेतु पुस्तकालय विभाग द्वारा पुस्तक समीक्षा प्रतियोगिता का सफल एवं प्रेरणादायक आयोजन किया गया। विद्यालय के वार्षिक शैक्षणिक कैलेंडर में शामिल इस प्रतियोगिता ने विद्यार्थियों को पठन-पाठन की ओर प्रेरित करने के साथ-साथ उनके विचारों को मंच प्रदान किया।
प्रतियोगिता में प्राथमिक एवं माध्यमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए अपनी पसंदीदा पुस्तकों की गहन और प्रभावशाली समीक्षा प्रस्तुत की। प्रतिभागियों ने कथानक, पात्रों, लेखक की शैली तथा पुस्तकों से मिली सीख पर विस्तार से प्रकाश डाला। हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में उपन्यास, कहानी संग्रह, जीवनी और सामान्य ज्ञान की पुस्तकों पर छात्रों ने उत्कृष्ट प्रस्तुति दी।
विद्यार्थियों ने विशेष रूप से Ramayana, Bhagat Singh पर आधारित जीवनी, साइकिल से हिमालय – साइक्लोथॉन, हमारा विश्वकोश, फुटबॉल अकादमी, विश्व धर्म, फादर क्रिसमस को एक पत्र, Harry Potter, Cars 2, मेरा गुप्त यूनिकॉर्न, Sudha Murty की कहानियाँ, सावित्री, Gautama Buddha तथा Pariksha Pe Charcha जैसी पुस्तकों पर मॉडल और व्याख्यान के माध्यम से प्रस्तुति दी, जिसने उपस्थित सभी लोगों को प्रभावित किया।
प्रतियोगिता के निर्णायक एवं विद्यालय के प्राचार्य डॉ. बसंत कुमार तिवारी ने प्रतिभागियों का मूल्यांकन विषय की समझ, प्रस्तुति शैली, भाषा की शुद्धता एवं मौलिकता के आधार पर किया। अपने प्रेरक संबोधन में उन्होंने कहा कि “पुस्तकें मनुष्य की सच्ची मित्र होती हैं। वे सोचने की नई दिशा देती हैं और व्यक्तित्व को परिष्कृत करती हैं। सशक्त समाज निर्माण के लिए बच्चों के हाथों में पुस्तकें होना अत्यंत आवश्यक है।”
कार्यक्रम के सफल संचालन का श्रेय पुस्तकालय प्रभारी श्रीमती पूजा सिंदवानी को जाता है, जिनके मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने पुस्तक चयन से लेकर समीक्षा लेखन तक उत्कृष्ट तैयारी की।
समापन अवसर पर सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। यह आयोजन विद्यार्थियों में पठन-पाठन की अभिरुचि, आलोचनात्मक चिंतन एवं आत्मविश्वास के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ। विद्यालय परिवार ने एक बार फिर सिद्ध किया कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ संस्कार और सृजनशीलता का समन्वय ही वास्तविक शैक्षणिक उत्कृष्टता की पहचान
