छत्तीसगढ़ में सख्त संदेश सत्ता पर नहीं चलेगा साया”: एमसीबी में श्यामबिहारी जायसवाल ने परिवारवाद पर कसा शिकंजा

 जिला ब्यूरो बबलू जायसवाल 


मनेंद्रगढ़। मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले की राजनीति में उस समय बड़ा संदेश गया, जब स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने ‘प्रॉक्सी राजनीति’ की प्रवृत्ति पर सख्त कार्रवाई करते हुए मनेंद्रगढ़ नगरपालिका अध्यक्ष प्रतिमा सरजू यादव के पति सरजू यादव को विधायक प्रतिनिधि पद से तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त कर दिया। उनकी जगह संगठन के सक्रिय कार्यकर्ता महेंद्र पाल सिंह को नई जिम्मेदारी सौंपी गई है।


इस फैसले को राजनीतिक विश्लेषक “सत्ता पर नहीं चलेगा साया” के स्पष्ट संदेश के रूप में देख रहे हैं।

परदे के पीछे की राजनीति पर रोक

स्थानीय निकायों में अक्सर यह आरोप लगते रहे हैं कि महिला जनप्रतिनिधियों के निर्वाचित होने के बाद उनके परिजन ही वास्तविक निर्णय लेने लगते हैं। इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था की पारदर्शिता और महिला नेतृत्व की स्वतंत्रता प्रभावित होती है।

मंत्री का यह कदम इसी प्रवृत्ति पर सीधा प्रहार माना जा रहा है। शासन स्तर पर भी स्पष्ट निर्देश हैं कि निर्वाचित प्रतिनिधियों के अधिकारों में किसी भी प्रकार का अनधिकृत हस्तक्षेप स्वीकार नहीं होगा।

एमसीबी बना ‘नो प्रॉक्सी’ मॉडल

एमसीबी जिला अब नगरीय निकायों में नियम आधारित व्यवस्था लागू करने को लेकर चर्चा में है। मनेंद्रगढ़ विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले निकायों में प्रतिनिधियों की नियुक्ति सक्रियता, संगठनात्मक योगदान और प्रशासनिक मानकों के आधार पर की जा रही है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि यह मॉडल प्रदेशभर में अपनाया गया तो स्थानीय शासन व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही मजबूत होगी।

रिश्तों से ऊपर नियम

राजनीतिक गलियारों में चर्चा रही कि सरजू यादव मंत्री के करीबी माने जाते थे। इसके बावजूद कार्रवाई होना यह संकेत देता है कि निर्णय व्यक्तिगत समीकरणों से ऊपर उठकर लिया गया है।

संगठन के जमीनी कार्यकर्ताओं में इस फैसले से उत्साह देखा जा रहा है। उनका कहना है कि अब परिवारवाद के बजाय कार्य और निष्ठा को प्राथमिकता मिलेगी।

महिला सशक्तिकरण की दिशा में मजबूत कदम

इस निर्णय को महिला जनप्रतिनिधियों को वास्तविक अधिकार देने की दिशा में अहम पहल माना जा रहा है। स्पष्ट संदेश है कि अब किसी भी स्तर पर ‘परदे के पीछे’ सत्ता संचालन को बढ़ावा नहीं दिया जाएगा।

निष्कर्षतः, एमसीबी से उठी यह पहल केवल एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों की पुनर्स्थापना और पारदर्शी राजनीति की ओर बढ़ता ठोस कदम है।

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