जिला ब्यूरो चीफ बबलू जायसवाल
मनेन्द्रगढ़। एमसीबी जिले में इन दिनों अवैध ईंट भट्ठों का कारोबार तेजी से फैलता जा रहा है। जिला मुख्यालय मनेन्द्रगढ़ सहित ग्रामीण क्षेत्रों में बिना अनुमति संचालित हो रहे ईंट भट्ठों ने पर्यावरणीय नियमों और खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासनिक जानकारी के बावजूद अवैध ईंट भट्ठा संचालकों पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है, जिससे अवैध कारोबारियों के हौसले लगातार बुलंद होते जा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार जिले के कई इलाकों में नियमों को ताक पर रखकर खुलेआम मिट्टी का अवैध उत्खनन किया जा रहा है। खेतों और सरकारी जमीनों से बड़ी मात्रा में मिट्टी निकालकर ईंट निर्माण का कार्य किया जा रहा है, लेकिन संबंधित विभाग आंख मूंदे बैठा हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि दिन-रात चल रहे इन भट्ठों से न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है बल्कि कृषि भूमि भी बर्बाद हो रही है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि अवैध ईंट भट्ठा संचालकों द्वारा बिना वैध अनुमति और मानकों का पालन किए कारोबार किया जा रहा है। कई स्थानों पर प्रदूषण नियंत्रण के नियमों की खुली अनदेखी हो रही है, जिससे आसपास के गांवों में धुआं और प्रदूषण फैल रहा है। इसके बावजूद खनिज विभाग की ओर से कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति किए जाने की चर्चा है।
जिले में यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर विभागीय अधिकारियों को इन अवैध गतिविधियों की जानकारी होने के बाद भी सख्त कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले समय में अवैध खनन और पर्यावरणीय क्षति की स्थिति और भयावह हो सकती है।
जिलेवासियों को अब नई कलेक्टर से काफी उम्मीदें हैं। लोगों का मानना है कि नई प्रशासनिक नेतृत्व में अवैध खनन और बिना अनुमति संचालित ईंट भट्ठों के खिलाफ सख्त अभियान चलाया जाएगा तथा जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होगी। आम नागरिकों को उम्मीद है कि नई कलेक्टर जिले में कानून व्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण को लेकर ठोस एवं प्रभावी कदम उठाएंगी।
सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि जिले में संचालित सभी ईंट भट्ठों की जांच कराई जाए तथा बिना अनुमति चल रहे भट्ठों पर तत्काल कार्रवाई की जाए। साथ ही अवैध मिट्टी उत्खनन में शामिल लोगों के खिलाफ भी सख्त कानूनी कदम उठाने की मांग की जा रही है।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन और खनिज विभाग इस गंभीर मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं या फिर अवैध कारोबारियों के सामने विभागीय कार्रवाई एक बार फिर कमजोर साबित होती है।
