जिला ब्यूरो चीफ बबलू जायसवाल
एमसीबी, मनेंद्रगढ़। जल संकट और ग्रामीण बेरोजगारी जैसी दो बड़ी चुनौतियों का एक साथ समाधान खोजने की दिशा में मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिला तेजी से आगे बढ़ रहा है। कलेक्टर सुश्री संतन देवी जांगड़े की दूरदर्शी सोच और जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीमती अंकिता सोम की प्रभावी कार्ययोजना के परिणामस्वरूप जिले में जल संरक्षण और रोजगार सृजन का एक व्यापक अभियान आकार ले रहा है। यही वजह है कि आज जिले के सैकड़ों गांवों में विकास के नए आयाम दिखाई देने लगे हैं।
मनरेगा के ‘मोर गांव मोर पानी अभियान’ के तहत जिले में बड़े पैमाने पर जल संरक्षण कार्य संचालित किए जा रहे हैं। आने वाले वर्षों में जल संकट की आशंकाओं को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने गांव-गांव में ऐसी स्थायी संरचनाएं विकसित करने का लक्ष्य तय किया है, जो वर्षा जल को सहेजने के साथ किसानों और ग्रामीणों की जरूरतों को भी पूरा कर सकें।
इसी सोच के तहत जिले में 40 से अधिक नवीन तालाबों, लगभग 300 आजीविका डबरियों, खेत तालाबों, परकोलेशन टैंकों, अर्दन चेक डैमों और भू-जल पुनर्भरण संरचनाओं का निर्माण कराया जा रहा है। इन कार्यों पर 12 करोड़ 83 लाख रुपये की राशि व्यय की जा रही है। प्रशासन का मानना है कि ये संरचनाएं केवल निर्माण कार्य नहीं, बल्कि जिले के जल भविष्य को सुरक्षित करने की मजबूत नींव हैं।
इस महत्वाकांक्षी अभियान का सबसे सकारात्मक पक्ष यह है कि वर्तमान में प्रतिदिन लगभग 20 हजार ग्रामीण श्रमिकों को उनके गांवों में ही रोजगार उपलब्ध हो रहा है। इससे हजारों परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं। मनरेगा के माध्यम से रोजगार और विकास को एक साथ जोड़ने की यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा दे रही है।
कलेक्टर सुश्री संतन देवी जांगड़े ने जिले में पदभार ग्रहण करने के बाद जल संरक्षण को प्राथमिकता वाले विषयों में शामिल किया है। उनका स्पष्ट मानना है कि भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए आज से ही जल संसाधनों का संरक्षण और संवर्धन आवश्यक है। उनके मार्गदर्शन में विभिन्न विभागों के समन्वय से जल संरक्षण कार्यों को मिशन मोड में संचालित किया जा रहा है।
वहीं जिला पंचायत सीईओ श्रीमती अंकिता सोम द्वारा योजनाओं की सतत समीक्षा, फील्ड मॉनिटरिंग और कार्यों की प्रगति पर लगातार नजर रखी जा रही है। उनकी कार्यशैली का प्रभाव यह है कि अधिकांश कार्य निर्धारित समय-सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण तरीके से आगे बढ़ रहे हैं। जिला पंचायत स्तर से लेकर ग्राम पंचायतों तक समन्वय स्थापित कर अभियान को जनभागीदारी से जोड़ने का प्रयास भी किया जा रहा है।
इन जल संरचनाओं के पूर्ण होने के बाद वर्षा जल का व्यापक संग्रहण संभव होगा। भू-जल स्तर में सुधार आएगा, किसानों को सिंचाई के अतिरिक्त साधन मिलेंगे और पशुपालकों को भी सालभर पानी की बेहतर उपलब्धता मिलेगी। इससे खेती की उत्पादकता बढ़ने के साथ ग्रामीण आजीविका को भी स्थायित्व मिलेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार बदलते मौसम, अनियमित वर्षा और बढ़ती जल आवश्यकताओं के दौर में ऐसे जल संरक्षण कार्य किसी भी जिले के लिए दीर्घकालिक निवेश की तरह होते हैं। यही कारण है कि एमसीबी जिले में संचालित यह अभियान केवल रोजगार योजना तक सीमित नहीं रहकर भविष्य की जल सुरक्षा का आधार बनता जा रहा है।
जिला प्रशासन का लक्ष्य केवल तालाब और डबरी बनाना नहीं, बल्कि जल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देना है। यदि यही गति और जनसहभागिता बनी रही तो आने वाले वर्षों में एमसीबी जिला जल संरक्षण, ग्रामीण रोजगार और सतत विकास के क्षेत्र में प्रदेश के लिए एक आदर्श मॉडल के रूप में अपनी अलग पहचान स्थापित करेगा।
