बार बार बिजली की आंख मिचौली से बसन्तपुर में फैला जनाक्रोश





 रघुसाहू रिपोर्टर जांजगीर चाम्पा छत्तीसगढ़ 


जांजगीर चाम्पा- जांजगीर चाम्पा जिले के बलौदा विखास खण्ड के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत बसन्तपुर में आये दिन बिजली की बार बार  आंख मिचौली से ग्राम वासियो को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है एक दिन में कई बार लाइन कटने की प्रक्रिया बरसात के मौसम से शुरू होकर अभी तक जारी है जबकि बरसात आने से पहले विभाग को बिजली की लचर ब्यवस्था दुरुस्त कर लेना चाहिए परन्तु विभाग की कार्य शैली प्यास लगने पर कुंआ खोदने जैसा है जिसके कारण फाल्ट आने पर घण्टो उस स्थान का की तलाश करने में लग जाता हैं तब जाकर घण्टो बाद मरम्मत की जाती हैं। वन्ही फोन से जानकारी लेने पर अक्सर इलेवन के वी के तार टूट जाने की बात कही जाती हैं जबकि इलेवन के वी में  बिजली की सप्लाई काफी उच्च मात्रा में होने व जमीन में गिरे तार की चपेट में आने के कारण मनुष्य के साथ साथ मवेशियों को भी जान का खतरा होता हैं क्योंकि अंधेरे में गिरे तार की जानकारी मवेशियों को नही होती वही लोग भी अनजाने में इसके शिकार हो सकते हैं।विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों को फील्ड में निरीक्षण कर बिजली ख़म्भे , केबल तार की गुडवत्ता,ट्रांस फार्मर की क्वालिटी आदि को देख परख कर ब्यवस्था दुरस्त करना चाहिये ताकि एक ही स्थान पर बार बार मरम्मत करने की जरूरत न पड़े। इससे लाइन मेन व कर्मचारियों को भी बार बार मेंटनेंस के लिए भाग दौड़ करना नही पड़ेगा।क्योंकि जान हथेली में लेकर लाइन परिचालकों को बिजली के खम्भो में चढ़कर कार्य करना पड़ता हैं   जिसके कारण कई लोग हादसे के शिकार भी हो चुके है परन्तुऑफिसियल कर्मचारियों  को इससे कोई मतलब नही है। चाहे कितने बार भी लाइन गोल हो।वास्तव में विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों को इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि जो  ट्रांसफार्मर लगाया गया है या लगाया जा रहा है क्या वह पर कनेक्शन के लिए पर्याप्त है कि नही वही दूसरी बात यह हैं कि लाइन का डिस्टिब्यूट सभी फेशो से बराबर लगाया गया हैं कि नही क्योकि कम व ज्यादा होने से डियो बार बार गीर सकती हैं लेकिन ठेका कर्मियों द्वारा आनन फानन में केबल खिंचकर घरों में कनेक्शन दे दिया जाता हैं उन्हें इस बात से कोई मतलब नही होता कि कितने घरों में किस फेश से कितना कनेक्शन हुआ है।दूसरी बात केबल की गुडवत्ता से काफी समझौता किया जाता हैं जिसके कारण बार बार केबल जलने लगता हैं परन्तु जिम्मेदार अधिकारी को एक नजर कार्य की गुडवत्ता को देखने की फुरसत ही नहीं है जिसके कारण आम उपभोक्ता को रात रात भर भुगतना पड़ता हैं। इन सब परेशानियों को देखते हुए आस पास के ग्रामो में बिजली विभाग के प्रति आक्रोश व्याप्त है जो कभी भी भयानक आंदोलन  को अंजाम दे सकते है ।जबकि आसपास के ये गांव CSEB मड़वा प्रोजेक्ट के आश्रित गांव होने के बावजूद यह स्थिति है जबकि  इन गांवों को प्राथमिकता के तौर पर  CSEB  को मूलभूत सुविधाओं की ओर ध्यान देना चाहिए नाकि नजर अंदाज करना चाहिए ये तो वही कहानी जैसी हो गई कि प्यासे वही रहते है जो समुंदर के किनारे हैं ।परन्तु कुछ हद तक जन प्रतिनिधियों की भी जिम्मेदारी बनती हैं कि  वे प्रशासन पर अपने अधिकार के हक के दावे की ताल ठोके परन्तु उनकी निष्क्रियता भी एक प्रमुख कारण हैं।

Post a Comment

Previous Post Next Post