भ्रष्टाचार पर अध्यक्ष ललिता यादव का 'सर्जिकल स्ट्राइक': खोंगापानी नगर पंचायत में 7 साल के वित्तीय कार्यों की महालेखाकार से विशेष जांच की मांग

 


पारदर्शिता की मिसाल: अध्यक्ष ललिता यादव ने खोला मोर्चा, वित्तीय गड़बड़ियों और कमीशनखोरी के खिलाफ निर्णायक लड़ाई शुरू

 वर्ष 2019 से 2026 तक के निर्माण, सामग्री खरीदी, बैंक खातों, योजनाओं व टेंडरों की स्वतंत्र ऑडिट टीम से होगी गहन पड़ताल

 अध्यक्ष की दो-टूक चेतावनी: "शासकीय धन की पाई-पाई का होगा हिसाब, जनता के हक पर डाका डालने वाले अधिकारी और ठेकेदार नहीं बख्शे जाएंगे"

जिला ब्यूरो चीफ बबलू जायसवाल 

खोंगापानी / मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (छ.ग.):

नगर पंचायत खोंगापानी की जनप्रिय, निर्भीक और विकासोन्मुख अध्यक्ष श्रीमती ललिता यादव ने नगर पंचायत में वित्तीय पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन स्थापित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी कदम उठाया है। नगर के विकास के लिए आने वाले शासकीय धन के सदुपयोग को सुनिश्चित करने और भ्रष्टाचार पर ज़ीरो टॉलरेंस नीति अपनाते हुए अध्यक्ष महोदया ने वर्ष 2019 से 2026 (विगत 7 वर्षों) की संपूर्ण अवधि के वित्तीय व प्रशासनिक कार्यों के विशेष एवं निष्पक्ष ऑडिट के लिए कार्यालय प्रधान महालेखाकार (रायपुर, छत्तीसगढ़) को पत्र प्रेषित किया है।

अध्यक्ष श्रीमती ललिता यादव के इस साहसिक व कड़े निर्णय से प्रशासनिक महकमे और मनमानी करने वाले ठेकेदारों व बिचौलियों में भारी हड़कंप मच गया है। नगर के आम नागरिकों और प्रबुद्ध जनों द्वारा अध्यक्ष की इस ईमानदार व पारदर्शी कार्यशैली की भूरी-भूरी प्रशंसा की जा रही है। अध्यक्ष महोदया ने स्पष्ट कर दिया है कि नगर पंचायत की जनता का विश्वास और नगर का सर्वांगीण विकास ही उनकी पहली प्राथमिकता है, और शासकीय धन की हेराफेरी करने वाले किसी भी रसूखदार को बख्शा नहीं जाएगा।

अध्यक्ष श्रीमती ललिता यादव द्वारा प्रस्तुत सभी 10 प्रमुख जांच बिंदु:

अध्यक्ष महोदया ने पत्र में अत्यंत सूक्ष्मता और गंभीरता से 10 प्रमुख बिंदुओं पर स्वतंत्र एवं सक्षम दल द्वारा जांच की मांग की है:

  भुगतान संबंधी जांच: ₹50,000 से अधिक तथा अन्य महत्वपूर्ण भुगतानों की फाइलों, भुगतान से पूर्व सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति एवं अनुमोदन की जांच, बिल, वाउचर, माप पुस्तिका (MB), भुगतान आदेश व बैंक भुगतान के मिलान तथा नियमों से बचने के लिए एक ही कार्य/खरीदी को छोटे-छोटे भुगतानों में विभाजित किए जाने की पड़ताल।

  PIC / नगर पंचायत परिषद के अनुमोदन की जांच: जिन मामलों में PIC अथवा परिषद की अनुमति आवश्यक थी, उनमें संबंधित प्रस्ताव एवं अनुमोदन, बैठक की कार्यवाही एवं भुगतान की तारीख का मिलान तथा स्वीकृति के बिना अथवा वित्तीय सीमा से बाहर जाकर किए गए भुगतानों की जांच।

 निर्माण कार्यों की विस्तृत जांच: प्रशासकीय एवं तकनीकी स्वीकृति, निविदा प्रक्रिया एवं कार्यादेश, माप पुस्तिका (MB), बिल एवं वास्तविक कार्य का मिलान, कार्य की गुणवत्ता, मात्रा, भुगतान का मिलान तथा पूर्णता प्रमाण-पत्र व संबंधित निरीक्षण अभिलेखों का भौतिक सत्यापन।

  सामग्री एवं खरीदी संबंधी जांच: सामग्री खरीदी में कोटेशन/निविदा प्रक्रिया, तुलनात्मक पत्रक, सप्लाई ऑर्डर व बिलों का परीक्षण, स्टॉक रजिस्टर में प्रविष्टि तथा मौके पर वास्तविक उपलब्ध सामग्री का मिलान, और एक ही आपूर्तिकर्ता (सप्लायर) को बार-बार किए गए संदेहास्पद भुगतानों की सघन जांच।

 बैंक एवं लेखा अभिलेखों की जांच: विगत 7 वर्षों (2019–2026) के दौरान नगर पंचायत के सभी बैंक खातों के स्टेटमेंट का परीक्षण, कैशबुक, लेजर, भुगतान रजिस्टर एवं बैंक खातों का मिलान, बैंक से निकासी व संबंधित वाउचर/बिल का मिलान, तथा लंबे समय से लंबित एवं समायोजन योग्य राशियों की पड़ताल।

  शासकीय योजनाओं की जांच: विभिन्न केंद्र एवं राज्य शासन की जनहितैषी योजनाओं में प्राप्त राशि, स्वीकृत कार्य, वास्तविक व्यय तथा शेष राशि का परीक्षण, और योजना के मूल उद्देश्य के अनुरूप राशि खर्च हुई है या नहीं, इसकी तथ्यात्मक जांच।

 * ठेकेदार एवं आपूर्तिकर्ताओं की जांच: संबंधित ठेकेदारों व आपूर्तिकर्ताओं का विधिवत पंजीयन एवं पात्रता, निविदा में उनकी भागीदारी व चयन प्रक्रिया, किए गए भुगतान एवं वास्तविक कार्य/आपूर्ति का मिलान, तथा संभावित संबंधित पक्षों अथवा 'हितों के टकराव' (Conflict of Interest) की स्थिति की जांच।

 * अभिलेखों की उपलब्धता एवं संधारण: ऑडिट के दौरान यदि कोई महत्वपूर्ण फाइल, रजिस्टर, वाउचर, MB, प्रस्ताव, बैंक अभिलेख अथवा अन्य दस्तावेज जानबूझकर उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो उसकी पृथक रूप से जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए।

 * नियम विरुद्ध व्यय की जांच: ऐसे सभी व्ययों की पहचान की जाए जिनमें सक्षम स्वीकृति, बजटीय प्रावधान, निविदा/क्रय प्रक्रिया अथवा अन्य निर्धारित शासकीय नियमों व प्रक्रियाओं का खुला उल्लंघन किया गया हो।

 * जवाबदेही एवं कठोर दंडात्मक कार्रवाई: ऑडिट के दौरान किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता अथवा शासकीय राशि के अनुचित उपयोग का तथ्य प्रमाणित होने पर संबंधित अधिकारी, कर्मचारी अथवा जिम्मेदार व्यक्ति की भूमिका व उत्तरदायित्व का स्पष्ट उल्लेख करते हुए नियमानुसार कड़ी कानूनी व दंडात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की जाए।

मूल अभिलेखों को सुरक्षित रखने और सील करने के कड़े निर्देश

अध्यक्ष श्रीमती ललिता यादव ने जनहित और शासकीय धन की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कलेक्टर (जिला मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर), नगरीय प्रशासन एवं विकास आयुक्त, और मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) को भी प्रतिलिपि जारी की है। उन्होंने मांग की है कि जांच पूर्ण होने तक सभी मूल अभिलेखों को सुरक्षित रखा जाए, ताकि कोई भी व्यक्ति इनमें किसी प्रकार का हेरफेर, कांट-छांट या छेड़छाड़ न कर सके।

"भ्रष्टाचार से कोई समझौता नहीं": अध्यक्ष ललिता यादव

> "खोंगापानी नगर पंचायत की जनता ने हमें विकास और विश्वास की जिम्मेदारी सौंपी है। नगर के विकास के लिए आई शासकीय राशि आम जनता की खून-पसीने की कमाई है। 2019 से 2026 के बीच हुए प्रत्येक काम और खर्च का दूध का दूध और पानी का पानी होना चाहिए। हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता वित्तीय पारदर्शिता और शुचिता स्थापित करना है। जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।"

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