रिपोर्टर -दीपक वर्मा
जिला -जशपुर छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ राज्य के उत्तर पूर्वी भाग में स्थित जशपुर जिला पूरे देश में अपने प्राकृतिक सुंदरता एवं नैसर्गिक सौंदर्य के लिए विख्यात है।कुदरत ने यहाँ के कण कण में सुंदरता बिखेरी है, यहाँ आज भी प्राकृतिक परिदृश्यों एवं धरोहरों के जीवंत छाप विद्यमान हैं।समुद्र तल से 2528 फ़ीट की ऊंचाई पर बसा जिला अपने प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है। कल-कल करते झरने ,नदियों एवं पहाड़ों की श्रृंखलाएं एवं समृद्ध प्राकृतिक वनस्पतियां जशपुर जिले के अनमोल धरोहर हैं।यहाँ प्राकृतिक दृश्यों की कोई कमी नहीं ,यहां के कि झरनों में संगीत की मधुर ध्वनि सुनाई देती है,गुफाओं में प्राकृतिक शैल चित्रों के जीवंत छाप आज भी दिखाई देते हैं,.....
जशपुर जिले के मुख्य आकर्षण दनगरी जलप्रपात जशपुर जिला मुख्यालय से 89 किमी दूर एवं बगीचा जनपद से 36 किमी दूर स्थित यह जलप्रपात सुलेसा पाट के दनगरी ग्राम में स्थित है। जलप्रपात की ऊंचाई समुद्र तल से करीब 250 फ़ीट है।बरसात के दिनों में जलप्रपात का वेग काफी तीव्र होता है एवं यह तीरथगढ जलप्रपात सदृश्य प्रतीत होता है।यह जलप्रपात घने जंगलों एवं पहाड़ों के बीच स्थित है।प्रतिदिन बड़ी संख्या में यहां पर्यटक पहुंचते हैं ,यहाँ पहुंचने के लिए नाला पार करना पड़ता है।बरसात के दिनों में यहां पहुंचना काफी कठिन होता है।
यदि यहाँ तक पहुंचने के लिए सड़क बन जाए तो अन्य सीमावर्ती जिलों से भी यहाँ पर्यटकों का पहुंचना सुगम हो जाएगा। यह जलप्रपात सरगुजा जिले की सीमा पर स्थित है।प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में यहां पर्यटक पहुंचते हैं।
मकरभंजा जलप्रपात जशपुर जिला मुख्यालय से 92 किमी दूर स्थित यह जलप्रपात जशपुर जिले के सबसे बड़े एवं छत्तीसगढ़ राज्य के सबसे ऊंचे जलप्रपात के रूप में चिन्हित किया गया है जिसकी ऊँचाई छत्तीसगढ़ के तीरथगढ जलप्रपात (300फ़ीट) से भी अधिक अर्थात 450 फ़ीट आंकी गई है।बगीचा जनपद के महनईपाट गांव के घने जंगलों में स्थित यह जलप्रपात पहुँच विहीन है।प्रशासन ने उक्त स्थल को पर्यटन के रूप में विकसित करने की योजना तैयार की है ।यह सरगुजा एवं जशपुर जिले की सीमा पर स्थित है।
यहाँ तक पहुंचने के लिए सड़क नहीं बनी है,जहां गहरी खाइयों से होकर करीब 2 किमी पैदल चलना पड़ता है।बुनियादी सुविधाओं का विस्तार कर यहाँ पर्यटन के द्वार खोले जा सकते हैं ।
रानीदाह जलप्रपात रानीदाह जलप्रपात जशपुर जिले के टॉप टेन पर्यटन स्थलों की सूची में शामिल है।जशपुर जिला मुख्यालय से 18किमी दूर यह जलप्रपात इचकेला ग्राम के समीप स्थित है। जलप्रपात की ऊंचाई करीब 20 फ़ीट है।बरसात के दिनों में यह जलप्रपात काफी खूबसूरत दिखाई देता है
यह जगह चारों ओर जंगलों से घिरा है।मुख्य मार्ग से निकट होने के कारण यहां अन्य सीमावर्ती राज्यों झारखंड, बिहार एवं ओडिशा से भी पर्यटक पहुंचते हैं।यह बेहद खूबसूरत पिकनिक स्पॉट भी है।
किनकेल घाटी जशपुर जिला मुख्यालय से महज 9 किमी दूर स्थित किनकेल वैली प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण है।समुद्र तल से काफ़ी ऊँचाई पर स्थित होने के कारण यहाँ सूर्योदय एवं सूर्यास्त के अनुपम नजारे दिखाई देते हैं, इस कारण यह घाटी सनराइज एवं सनसेट वैली के रूप में जाना जाता है।देशदेखा यहां का मुख्य आकर्षण है जहाँ से प्राकृतिक सौंदर्य एवं पहाड़ों की लंबी श्रृंखलाएं दिखाई देती है।
खुड़िया रानी की गुफा
जशपुर जिला मुख्यालय से 135 किमी दूर यह गुफा हरी भरी पहाड़ियों पर अवस्थित है।
खुड़िया रानी की गुफा जिले के प्राचीन ऐतिहासिक धरोहर में शामिल है जिसका इतिहास आज किवदंतियों में सिमट कर रह गया है ,इतिहास के जानकारों के अनुसार चीनी यात्री व्हेनसांग ने यहां अपने शाही सैनिकों के साथ यहाँ गौतम बुद्ध की प्रतिमा लगवाई थी।गुफा का नामकरण एक चिड़िया के नाम पर किया गया है।गुफा के बाह्य एवं आंतरिक भाग की सुंदरता काफी निराली है ।गुफा के बाहरी भाग में आज भी शैल चित्रों के रूप में प्राकृतिक छाप जीवंत है।पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में कार्य कर रहे एस पी यादव ने बताया कि
जिले का यह एक इकलौता स्थान है जहां इस प्रकार के शैलचित्र देखे गए हैं ।रायगढ़ जिले के सिंघनपुर की गुफाओं एवं कबरा पहाड़ी एवं साथ ही सरगुजा जिले के डीपाडीह और रामगढ़ सूरजपुर में स्थित सीताबेंगरा एवं जोगीमारा की गुफाओं में इस प्रकार की चित्रकारी देखी जा सकती है।यहां दो प्राकृतिक गुफायें हैं।गुफा के आंतरिक भाग में विज़िबिलिटी कम है, यह गुफा 100 फ़ीट लम्बी है।इसके समीप ही नदी में जलप्रपात भी काफी मनोरम है। प्राचीन समय में यह जगह खुड़िया दीवान क्षेत्र का शक्ति केंद्र था जहाँ से रियासत के एक बड़े हिस्से का संचालन होता था। पर्यावरण मामलों के जानकार एस पी यादव ने बताया कि यह जगह आध्यात्मिक होने के साथ साथ इसका भौगोलिक महत्व भी है। यहां तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क नहीं बनी है।बुनियादी सुविधाओं का विस्तार यदि इस जगह पर हो तो जल्द ही यह जगह भी प्रदेश के मानचित्र में शुमार हो जायेगा।
कैलाश गुफा :जशपुर जिला मुख्यालय से 114 किमी एवं सरगुजा संभाग मुख्यालय से 85 किमी दूर स्थित यह गुफा काफी अलौकिक है।यह गुफा प्राकृतिक है एवं घने जंगलों से घिरा हुआ है।प्रतिवर्ष यहां सावन के महीने में महाशिवरात्रि के मौके पर विशाल मेला लगता है जहाँ छत्तीसगढ़ राज्य समेत अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं।यहाँ से होकर अलकनंदा नदी प्रवाहित होती है जहाँ पहाड़ों की ऊंचाई से अलकनंदा जलप्रपात का दृश्य दिखाई देता है।यहाँ देश का दूसरा एवं छत्तीसगढ़ राज्य का एकमात्र प्राच्य संस्कृत महाविद्यालय भी स्थित है जिसकी स्थापना 1965 में हुई थी।वर्तमान में यह महाविद्यालय पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर से सम्बद्ध है।यह स्थान संत रामेश्वर गहिरा गुरु की तपोभूमि रही है ,उन्होंने ही इस स्थल को दर्शनीय स्थल के रूप में विकसित किया था।पर्यटन की संभावना को देखते हुए
कैलाश गुफा में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार काफी आवश्यक है।
राजपुरी जलप्रपात: जिला मुख्यालय से 90 किमी दूर राजपुरी जलप्रपात जिले का बेहद खूबसूरत वाटरफॉल है जो राजपुरी नदी पर स्थित है।बरसात के दिनों में इसका वेग काफी अधिक होता है लेकिन गर्मी के दिनों में यह पूरी तरह सूखने के कगार पर पहुंच जाती है।यहां पर्यटकों के लिए विश्राम गृह एवं यात्री शेड बनाए गए हैं।
कोतेबिरा ईब रिवर फॉल जिला मुख्यालय से 82 किमी दूर यह जलप्रपात छत्तीसगढ़ -ओडिशा मुख्य मार्ग पर स्थित है।यह धार्मिक महत्व का स्थल है। यहां कपाट द्वार तक पहुंचने के लिए रास्ते नहीं है जिसे ध्यान में रखते हुए प्रशासन द्वारा यहां रोप वे लगाने की योजना है।यहाँ प्राचीन शिव मंदिर स्थित है।कार्तिक पूर्णिमा को यहाँ मेला लगता है।
गुल्लू जलप्रपात गुल्लू जलप्रपात जशपुर जिला मुख्यालय से 45 किमी दूर अलोरी के घने जंगलों में स्थित है।यहां गुल्लू डेम बनाया गया है जहां हाइड्रोइलेक्ट्रिक पॉवर प्लांट से बिजली पैदा की जाती है।गर्मी के दिनों में यह जलप्रपात पूरी तरह सूख जाता है।
नीमगांव जलाशय बर्ड सैंक्चुअरी
यह जगह प्रवासी पक्षियों के लिए प्रसिद्ध है जहां प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में यहाँ मौसम एवं जलवायु के अनुकूल वातावरण में आस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका, साइबेरिया एवं यूरोपियन देशों से विदेशी परिंदों का आगमन होता है।ये प्रवासी पक्षी प्रजजन एवं अनुकूलन के लिए नवम्बर ,दिसम्बर के महीनोंप्ति: जशपुर में आते हैं एवं गर्मी के आगमन के पूर्व ही स्वदेश लौट जाते हैं।जिला प्रशासन एवं वन विभाग ने इस जगह को पक्षी अभयारण्य के रूप में विकसित किया है।



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