सूरजपुर जिले के रामानुज नगर क्षेत्र अंतर्गत प्राथमिक साला पस्ता के प्रधान पाठक द्वारा आदिवासी बच्चों के साथ पढ़ाई के नाम पर जानबूझकर भेदभाव करता है नदारद प्रधान पाठक का नाम तक नहीं जानते बच्चे पलकों में आक्रोश किया गया हटाने की मांग।

 




जिला.....सूरजपुर छत्तीसगढ़।

संवाददाता....सुरेंद्र साहू।


छत्तीसगढ़ राज्य के उत्तरी सरहदी क्षेत्र जो कि संविधान की पांचवी अनुसूचित क्षेत्र के अंतर्गत आता है जहां अनुच्छेद 244(1)  लागू है बहरहाल इन इलाकों मे इन वर्गों की शैक्षणिक संस्थाओं मे इन वर्गों की शिक्षा के स्तर को संवारना सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है। लेकिन ऐसे इलाकों में पदस्थ कुछ ऐसे कर्मचारी हैं। जो इन वर्गों से आंतरिक तौर पर भेदभाव रखते हैं। इन वर्गों की मूल विकास की जड़ शिक्षा है जिस निव को जानबूझकर शिक्षा के मंदिर में कुछ अन्य वर्ग के शिक्षकों द्वारा खिलवाड किया जा रहा है। जिन  बच्चों का भविष्य सवरने के जगह बिगड़ते हुए दिख रहा । यहां के बच्चे पुस्तक पढना तो दुर्भाग्य है। कि अपने प्रधान पाठक जिस पर स्कूल प्रबंधन कि सारी जिम्मेदारी होती है। जिनका नाम तक नहीं जानते। स्थानीय बच्चों एवं बालकों का कहना है कि प्राथमिक शाला पस्ता में पदस्थ प्रधान पाठक महीने में 6 से 7 दिन विद्यालय आते हैं और अनुपस्थित दिन का भी अपनी उपस्थिति हाजिरी रजिस्टर में दर्ज कर लेते हैं। और उपस्थिति रजिस्टर को ताला बंद कर स्कूल से निकल लेते हैं। जो कि आए दिन  शिक्षक आदत में शुमार हो गया है। इस प्रकार की शिकायत मिलने पर पालक एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों के द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी,जिला कलेक्टर सूरजपुर, स्थानीय सांसद व केंद्रीय मंत्री रेणुका सिंह, प्रेम नगर विधायक खेल साय सिंह, से भी जन शिकायत की है।अब देखना  यह है कि क्या कारवाही होती है।या नहीं होती है। पालको एवं जनप्रतिनिधियों के द्वारा बताया गया कि। यदि शीघ्र कार्यवाही नहीं हुआ तो हम लोग अपने बच्चों का भविष्य ऐसे शिक्षकों के हाथों नहीं बिगड़ने देंगे। अंतिम विकल्प आंदोलन होगा। फिलहाल यह क्षेत्र विकास खंड शिक्षा अधिकारी रामानुजनगर के अंतर्गत ग्राम पंचायत पस्ता के जूनापारा का प्राथमिक शाला का है इन दिनों लंबे समय से प्राथमिक पाठशाला पस्ता जूनापारा में प्रधान पाठक के पद पर पदस्थ दिनेश कुमार दुबे हैं जिनके द्वारा लगातार विद्यालय में बार-बार अनुपस्थित रहना पाया गया। जिसमें से महत्वपूर्ण दिन हाल ही में 30 अक्टूबर 8 नवंबर को पालक संघ द्वारा विद्यालय में जाकर।स्कुल के बच्चों से जानकारी लेने के अनुसार बताया गया कि प्रधान पाठक हमेशा विद्यालय में अनुपस्थित रहते हैं। जिसका परिणाम है कि यहां तक स्कूल के बच्चों को उनके प्रधान पाठक तक का नाम पूछने पर नहीं बता सके ।पढ़ाई ऊपर के भरोसे चल रहा  गौरतलब है। कि महीने में पांच 6 -7दिन ही स्कूल आते हैं। ऐसे में हमारे देश के भविष्य का निर्माता कहलाने वाले इन बच्चों का पूरा जीवन अंधकारमय हो रहा है।कुल मिलाकर इसे विडंबना कहें या दुर्भाग्य का खेल ग्राम पंचायत पस्ता के सभी प्रतिनिधियों ने  गंभीरतापूर्वक विचार व्यक्त करते हुए कहा। कि स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी किए गए आदेश एवं सूचना के आधार पर ऐसे कर्मचारी के ऊपर कड़ी कार्यवाही करते हुए तत्काल प्रभाव से प्राथमिक शाला पस्ता से हटाया जाए। और किसी दूसरे दूसरे शिक्षक को पदस्थ कराया जाए। उक्त विषय पर सर्वप्रथम आवेदन जिला शिक्षा अधिकारी सूरजपुर, माननीय कलेक्टर महोदय जिला सूरजपुर,सहायक आयुक्त आ.जा.का विभाग सूरजपुर, केंद्रीय राज्य मंत्री भारत सरकार नई दिल्ली, विधायक प्रेम नगर,के नाम स्थानीय सरपंच एवं पालको के द्वारा ज्ञापन सौंपा गया।

ज्ञापन सौंपने में मुख्य रूप से उपस्थित मनोज कुमार सिंह सरपंच ग्राम पंचायत , पूरन राम,उप सरपंच ग्राम पंचायत पस्ता। पूर्व सरपंच प्रतिनिधि विश्वनाथ सिंह, दिराज कुमार प्रजापति, नंदू राम राजवाड़े,सोने लाल राजवाड़े ,नंदाराम राजवाड़े,नंद लाल प्रजापति,डी.पी. सिंह  मरकाम ओमप्रकाश सिंह, दियो सिंह, भोलाराम राजवाड़े,जितराय प्रजापती,योगेश कुमार, अरविंद राजवाड़े नाहर सिंह प्रदीप, तीरथ सिंह, तूलकेश्वर, रामकुमार, अदल सिंह, सुखसाय, नारायण राम राजवाड़े एवं सैकड़ों की संख्या में पालक एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित थे

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