जिला के ब्यूरो बबलू जायसवाल
मनेन्द्रगढ़। भीषण गर्मी के बीच शहर में लगातार हो रही अघोषित बिजली कटौती ने आमजन का जनजीवन पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। हालत यह है कि अब बिजली संकट के कारण पेयजल व्यवस्था भी चरमरा गई है और शहर के कई वार्डों में लोगों को पानी के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लगातार बढ़ रही समस्या को लेकर नगरवासियों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
चेन्नुपर स्थित नवीन इंटकवेल, हसदेव इंटकवेल एवं जलगृहों की विद्युत आपूर्ति बाधित होने से नियमित जलापूर्ति प्रभावित हो रही है। नगर पालिका परिषद मनेन्द्रगढ़ के पार्षद एवं जल प्रभारी सदस्य दयाशंकर यादव ने इस गंभीर समस्या को लेकर विद्युत विभाग के कार्यपालन अभियंता को पत्र लिखकर तत्काल व्यवस्था सुधारने की मांग की है।
पत्र में उल्लेख किया गया है कि शहर में प्रतिदिन 8 से 10 घंटे तक बिजली कटौती की जा रही है, जिससे जलापूर्ति व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो रही है। कई मोहल्लों में लोगों को दिनभर पानी नहीं मिल पा रहा, जिससे लोगों को भीषण गर्मी में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति यह हो गई है कि लोगों में बिजली विभाग के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है।
बताया गया है कि चेन्नुपर स्थित नवीन इंटकवेल को “केल्हारी फीडर” से विद्युत आपूर्ति दी जा रही है, जहां लगातार बिजली कटौती होने से पानी सप्लाई व्यवस्था बाधित हो रही है। इसके कारण शहर के कई वार्डों में पेयजल संकट गहरा गया है। साथ ही गंदगी और बीमारियों के फैलने की आशंका भी बढ़ने लगी है।
पार्षद दयाशंकर यादव के साथ सरजू यादव, विनीत जायसवाल, रामधुन जायसवाल, ओमप्रकाश जायसवाल, सुशील सिंह, सपन महतो, अजीमुद्दीन अंसारी “गुड्डा भैया” एवं बृजेश जायसवाल ने विद्युत विभाग से मांग की है कि नवीन इंटकवेल को केल्हारी फीडर से हटाकर मनेन्द्रगढ़ शहर अथवा शहरी फीडर से जोड़ा जाए, ताकि जलापूर्ति सुचारू रूप से संचालित हो सके।
पार्षदों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर बिजली एवं जलापूर्ति व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो जनता का आक्रोश सड़कों पर दिखाई दे सकता है। उन्होंने कहा कि गर्मी के इस मौसम में बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं की अनदेखी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
नगरवासियों का कहना है कि बिजली और पानी दोनों की समस्या ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। अब सभी की निगाहें विद्युत विभाग की कार्यवाही पर टिकी हुई हैं।