एमसीबी में लघुवनोपज और वन आधारित आजीविका को मिला नया संबल, वन विभाग की पहल की सराहना
एमसीबी/चिरमिरी, माननीय मुख्यमंत्री के एमसीबी प्रवास के दौरान तानसेन भवन पोंडी चिरमिरी परिसर में वन विभाग द्वारा लगाए गए आकर्षक एवं जनजागरूकता आधारित स्टॉल ने सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। मुख्यमंत्री ने स्टॉल का अवलोकन कर वन विभाग द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की तथा वनांचल क्षेत्रों में आजीविका संवर्धन की दिशा में इसे महत्वपूर्ण पहल बताया।
इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल भी मौजूद रहे। दोनों मंत्रियों ने वन विभाग की योजनाओं और लघुवनोपज आधारित गतिविधियों की जानकारी ली तथा वनवासियों की आय बढ़ाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की प्रशंसा की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि “वन विभाग केवल जंगलों के संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि वनवासियों की आर्थिक समृद्धि और आत्मनिर्भरता का भी मजबूत माध्यम बन रहा है। तेंदूपत्ता और लघुवनोपज से जुड़े कार्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दे रहे हैं।”
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि “वन विभाग द्वारा संचालित योजनाएं ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों के लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। शासन की मंशा है कि वन उत्पादों का उचित मूल्य सीधे संग्राहकों तक पहुंचे और उन्हें आर्थिक लाभ मिले।”
कार्यक्रम के दौरान जिले की 4 समितियों के तेंदूपत्ता संग्राहकों को कुल राशि 33 लाख 40 हजार 40 रुपये का प्रतीकात्मक चेक प्रदान कर एमसीबी जिले में तेंदूपत्ता भुगतान का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर संग्राहकों के चेहरे पर खुशी साफ दिखाई दी। वन विभाग की इस पहल से वनवासियों और ग्रामीण परिवारों को आर्थिक मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
वन विभाग द्वारा लगाए गए स्टॉल में 67 प्रकार के लघुवनोपज को उनके समर्थन मूल्य सहित प्रदर्शित किया गया। इससे आम लोगों को वन संपदा, उनके उपयोग और शासन द्वारा निर्धारित समर्थन मूल्य की जानकारी प्राप्त हुई। स्टॉल में स्थानीय वन उत्पादों से तैयार वस्तुओं ने भी लोगों को आकर्षित किया।
इसके साथ ही “संजीवनी” के माध्यम से सीजी हर्बल उत्पादों की बिक्री हेतु विशेष दुकान लगाई गई, जहां विभिन्न आयुर्वेदिक एवं हर्बल उत्पादों की बिक्री की गई। कार्यक्रम के दौरान कुल 4,120 रुपये की बिक्री दर्ज की गई, जो स्थानीय हर्बल उत्पादों के प्रति लोगों की बढ़ती रुचि को दर्शाता है।
वन विभाग द्वारा किए गए इस प्रयास को ग्रामीण अर्थव्यवस्था, वनाधारित रोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। विभाग लगातार लघुवनोपज संग्रहण, प्रसंस्करण और विपणन के माध्यम से वनवासियों की आय बढ़ाने का कार्य कर रहा है।
कार्यक्रम में सीसीएफ, वन मंडलाधिकारी चंद्र कुमार अग्रवाल, वन विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

