चिरमिरी राममय: जटायु त्याग और शबरी भक्ति सुन भावुक हुए श्रद्धालु, जगद्गुरु बोले — “सच्चा वैष्णव वही जो दूसरों की पीड़ा समझे”

 जिला ब्यूरो चीफ बबलू जायसवाल 



पत्नी को ‘आप’ कहकर संबोधित करना ही भारतीय संस्कृति और शास्त्रों के अनुरूप” — जगद्गुरु रामभद्राचार्य

चिरमिरी।एमसीबी एमसीबी जिले के चिरमिरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम में आयोजित भव्य श्रीराम कथा महोत्सव के आठवें दिन पूरा वातावरण राममय और भक्तिमय हो उठा। विश्वविख्यात संत एवं तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज ने भगवान श्रीराम के वनवास काल के अत्यंत मार्मिक प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा के दौरान जटायु के अद्भुत त्याग और माता शबरी की निष्कलंक भक्ति का प्रसंग सुनकर हजारों श्रद्धालु भावुक हो उठे। कथा पंडाल “जय श्रीराम” और “जय बजरंगबली” के जयघोष से गूंजता रहा।

जगद्गुरु ने अपने प्रवचन में कहा कि चिरमिरी की पावन भूमि स्वयं भगवान श्रीराम से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि जहां राम कथा होती है, वहां स्वयं प्रभु श्रीराम का वास होता है और वहां का वातावरण स्वतः ही पवित्र और दिव्य बन जाता है।

कथा में जटायु प्रसंग का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि जटायु ने माता सीता की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान देकर यह संदेश दिया कि धर्म और नारी सम्मान की रक्षा करना सबसे बड़ा कर्तव्य है। भगवान श्रीराम ने जटायु को अपने पिता समान सम्मान देकर यह सिद्ध किया कि सच्ची निष्ठा, त्याग और धर्म रक्षा कभी व्यर्थ नहीं जाती।

वहीं माता शबरी प्रसंग सुनाते हुए जगद्गुरु भावुक हो उठे। उन्होंने कहा कि माता शबरी ने प्रभु श्रीराम को अपने प्रेम और निष्कपट भक्ति से जूठे बेर खिलाए, लेकिन भगवान ने उनमें भक्ति का अमृत देखा। यह प्रसंग सिखाता है कि प्रभु को आडंबर नहीं, बल्कि निर्मल हृदय और सच्चा प्रेम प्रिय होता है।

अपने ओजस्वी प्रवचन में जगद्गुरु ने कहा कि “सारा संसार वैष्णव है।” उन्होंने कहा कि सच्चा वैष्णव वही होता है जो दूसरों की पीड़ा को समझे और करुणा, दया तथा सेवा के मार्ग पर चले। उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास जी के संदर्भ देते हुए कहा कि वैष्णव के लिए “सज्जन” और “हरिजन” जैसे शब्द प्रयुक्त किए गए हैं, जहां हिंसा और द्वेष के लिए कोई स्थान नहीं है।

उन्होंने बलि प्रथा पर भी अपनी बात रखते हुए कहा कि “बलि” का वास्तविक अर्थ समर्पण होता है, किसी पशु की हत्या नहीं। वैष्णवता प्रेम, सेवा और करुणा का मार्ग है तथा रामचरितमानस मानव जीवन को मर्यादा, त्याग और प्रेम का संदेश देती है।

कथा के दौरान उन्होंने पारिवारिक संस्कारों और सामाजिक मर्यादाओं पर भी विशेष जोर दिया। जगद्गुरु ने कहा कि पति द्वारा पत्नी को “तू” या “तुम” कहकर संबोधित करना शास्त्रसम्मत नहीं माना गया है। पत्नी को सदैव “आप” कहकर सम्मानपूर्वक संबोधित करना ही भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा के अनुरूप है।

उन्होंने आगे कहा कि प्रभु श्रीराम का नाम स्वयं में महामंत्र है और सुंदरकांड जीवन में साहस, सेवा, समर्पण तथा अटूट विश्वास का संदेश देता है। भरत के त्याग और हनुमान जी की निष्काम भक्ति को उन्होंने भारतीय संस्कृति का सर्वोच्च आदर्श बताया।

कथा श्रवण के लिए प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल अपनी धर्मपत्नी कांती जायसवाल के साथ श्रद्धाभाव से उपस्थित रहे। इस दौरान हजारों श्रद्धालुओं ने कथा का रसपान किया। आयोजन समिति द्वारा श्रद्धालुओं के लिए पेयजल, प्रसाद एवं बैठने की समुचित व्यवस्था की गई थी।

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