रिपोर्टर - दीपक वर्मा
जिला - जशपुर छत्तीसगढ़
जशपुर जिला अस्पताल में मेडिकल कचरे का अंबार लगा हुआ है। अस्पताल की बाउंड्रीवॉल के भीतर ही गेट नंबर दो के पास भारी मात्रा में मेडिकल कचरे के साथ वार्ड में भर्ती मरीजों के कचरे फेंके हुए हैं। अस्पताल प्रबंधन ने गेट नंबर दो को कोरोना के वक्त से ही बंद रखा है। पर इस वेस्ट से ना सिर्फ अस्पताल में भर्ती मरीज बल्कि स्टाप के कमर्चारी भी परेशान है, आसपास के लोग अस्पताल किसी के इलाज के लिए आने वाले लोग भी अब परेशान हो रहे हैं और ख़ास बात यह है कि अस्पताल के स्टाप नर्स ने बताया कि सिविल सर्जन आर. एन केरकेट्टा को कचरा उठाव के विषय में 8 दिन पूर्व में लिखित आवेदन पेश किया गया है, लेकिन प्रबंधन राजेश कुरील की नजरों में शायद आवेदन नजर नही आ रही है, या सिविल सर्जन आवेदन अपने पास रखे हुए है, और ना ही, गंदगी नजर आ रही है,सहाब को किया ओ तो अपने ऑफिस कक्ष में आराम फरमा रहे है,
आखिर सोचने वाली बात यह है कि अस्पताल के कर्मचारियों द्वारा आवेदन देने के बाद कचरा उठाया जाता है, शायद सहाब लोगों के नजर में नही पड़ती है और खास बात तो यह है कि अभी आवेदन भी नजर नही पड़ रही है आम जनता को इसका दंन्स झेलना पड़ रहा है अस्पताल परिसर में गेट नंबर दो के पास करीब 5 डस्टबिन रखे गए हैं। बताया जाता है कि सभी डस्टबिन भर चुके हैं और कचरे का उठाव महीनों से नहीं हुआ है। इसलिए डस्टबिन के पास बाहर ही कचरा फेंका जा रहा है। जिस जगह पर कचरा डंप हो रहा है, वहां प्रसव वार्ड दवा वितरण कक्ष और अस्पताल की कैंटीन है। इस कचरे के कारण कैंटीन में ग्राहक नहीं आ रहे हैं और दवा लेने या इंजेक्शन लगवाने के लिए पहुंचने वाले सभी मरीजों को कचरे की बदबू झेलनी पड़ रही है।दरअसल इस कचरे का उठाव का जिम्मा नगरपालिका का है। पालिका द्वारा समय-समय पर कचरा उठाकर उसे सूने स्थान पर गड्ढ़े में डाला जाता है। पालिका द्वारा मेडिकल वेस्ट कुछ समय पहले तक बालाछापर के पास फेंका जा रहा था। अब देखना होगा विभाग गहरी नींद से कब जागती है,और आमजनों को इस समस्या से निजात कब तक मिलती है,उमीद करते है विभाग की जल्द ही नींद खुल जाये और आमजनों साथ ही अस्पताल के कर्मचारियों को छुटकारा मिल सके।

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