रिपोर्टर दीपक वर्मा
जिला जशपुर छत्तीसगढ़
जिला कलेक्टर महादेव कावरे के विशेष मार्गदर्शन में रविवार को नेशनल इनोवेशन फोरम के तत्वावधान में बालिका शिक्षा, वर्तमान परीक्षा प्रणाली एवं अन्य कई ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा के लिए एकदिवसीय ऑनलाइन कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई, ऑनलाइन कॉन्फ्रेंस में जिले के विभिन्न कालेजों एवं स्कूलों के स्टूडेंट्स ,प्रोफेसर्स ,एवं विशेषज्ञ लाइव जुड़े।
ऑनलाइन कॉन्फ्रेंस में शामिल स्टूडेंट्स को लाइव संबोधित करते हुए जशपुर से विशेषज्ञ एस पी यादव ने कहा कि यदि बालिकाओं को बेहतर शिक्षा और परिवार के साथ समाज का समर्थन मिले तो वे भी वैज्ञानिक,आईएएस , डॉक्टर, शिक्षक बनकर देश एवं समाज के विकास में योगदान दे सकती हैं लेकिन हमें लड़कियों की शिक्षा के प्रति वर्षों से चले आ रहे समाज की पूर्व धारणाओं एवं पूर्वाग्रह को बदलना होगा। बालिकाएं सभी महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं, किसी भी राष्ट्र का विकास तभी संभव है जब उस राष्ट्र के सभी नागरिकों का विकास हो ,शिक्षा लिंग के आधार पर होने वाले भेदभाव को रोकने में मदद करती है।हमारे देश में लड़कियों की शिक्षा सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए बेहद जरूरी है, आर्थिक संकट के इस युग में जहां मध्यमवर्गीय परिवार को अपनी जरूरतों को पूरा करना कठिन हो रहा है ,वहां लड़कियों के लिए शिक्षा एक वरदान जैसे है।बेहतर अर्थव्यवस्था और बेहतर समाज की नींव बालिकाओं की शिक्षा से ही संभव है।सरकार को बालिकाओं के सशक्तिकरण के दिशा में किये जा रहे योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन करना चाहिए। उन्होंने वर्तमान परीक्षा प्रणाली में बदलाव की बात कही।
शासकीय महाविद्यालय तपकरा से एक्सपर्ट डॉ सुरेश कुमार पटेल सहायक प्राध्यापक ने स्टूडेंट्स को बताया कि वर्तमान समय में बालिकाओं की शिक्षा समाज के विकास के लिए जरूरी है ,शिक्षा का उद्देश्य राष्ट्र का कल्याण करना है।हमें रचनात्मक सोच की जरूरत है जिससे वर्तमान शिक्षा प्रणाली में व्याप्त दोषों को दूर किया जा सके। उन्होंने बताया कि बालिका शिक्षा के उन्मुखीकरण की दिशा में सरकार द्वारा लगातार प्रयास किया जा रहा है, शिक्षण संस्थानों के साथ ही कन्या महाविद्यालयों की स्थापना कर इस दिशा में कार्य हो रहे हैं एवं साथ ही रोजगार उन्मुखीकरण एवं व्यावसायिक संस्थानों की स्थापना की जा रही है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा सभी दृष्टि से जरूरी है ,बालिकाओं की शिक्षा की बेहतरी के लिए हमें मिलकर कार्य करना होगा ,वर्तमान परीक्षा के पैटर्न में हुए बदलाव के कारण स्टूडेंट्स की अध्ययन के प्रति रूचि कम हो रही है, इसमें संशोधन की जरूरत है,आने वाले दिनों में स्टूडेंट्स को अपने करियर निर्धारण में भी कई प्रकार की दिक्कतें होगी । उन्होंने नई शिक्षा नीति के विभिन्न पहलुओं की विस्तार से जानकारी दी एवं व्यवहारिक एवं प्रायोगिक ज्ञान की ओर ध्यान केंद्रित करने को कहा।
उन्होंने बताया कि भारत में बालिकाओं की शिक्षा के प्रति लम्बे समय से भेदभाव होता रहा है, समाज आज भी अपनी पूर्व धारणाओं के कारण बालिकाओं को स्वीकार नहीं करता, बालिका शिक्षा के प्रति हमे समाज में जागरूकता लाना होगा।,उन्होंने वर्तमान परीक्षा प्रणाली पर जोर देते हुए कहा कि वर्तमान परीक्षा से देश की नींव खोखली एवं छात्रों का भविष्य बर्बाद हो रहा है, शिक्षा के नीति निर्माताओं एवं शिक्षाविदों को इसमें आवश्यक सुधार करना होगा। छात्रों ने इस दौरान जिज्ञासा आधारित कई सवाल पूछे जिसका जबाब विशेषज्ञों ने विश्लेषण करके दिया।

Post a Comment