मवेशियों को जंगल में छोड़ने के नाम पर की जा रही किसानों से उगाही

 



रघुसाहू रिपोर्टर जांजगीर चाम्पा छत्तीसगढ़ 


जांजगीर चाम्पा-एक जमाना था जब किसानों को खेती किसानी के लिए पूरे मवेशियों पर निर्भर रहना पड़ता था परन्तु अब हाईटेक युग आने के कारण अब  मवेशी किसानों के लिए मुसीबत साबित हो गई हैं पंच सरपंच मवेशियों को जंगल में छोड़ने के नाम पर पैसे उगाही कर कत्ल खाने भेज रहे हैं। आज गांव गांव में पशु तस्करी करने वाले लोग अभी शक्रिय हो गए हैं।राज्य सरकार के पशु धन व जैविक कृषि को बढ़ावा देने के लिए की गई गोधन न्याय योजना भी जिले में दम तोड़ रही हैं हालांकि इस योजना को गोठान में एजी लाने के लिए पखवाड़े भर पहली जिले के सभी ब्लाकों के गोठानो में नोडल अधिकारी नियुक्त किया है लेकिन अभी तक कोई भी गोठानो में नोडल अधिकारीयो का जाना तो दूर गोठान समिति के लोगो से जानकारी लेना भी उचित नहीं समझा।जिले के हर एक गाँवो मैं पशुओं की संख्या बहुत कम हो गई हैं।

वही अपनी नौकरी बचाने के लिए शासन को कागजो में झूठी रिपोर्ट भेजी जा रही हैं।राज्य सरकार के महत्वकांक्षी योजना में हर एक गाँवो में पशुओं का सर्वे का काम कागजो में ही किया गया है।अपनी नौकरी बचाने के लिए ग्राम पंचायत के सचिव व पशुधन विकाश विभाग के अधिकारी गोधन न्याय योजना में 2रुपये किलो की दर पर गोबर खरीदी की जानकारी पशु संख्या व पशु पालकों की गलत तरीके से जानकारी भेजी गई हैं।बलोदा ब्लाक के कमरीद गांव में गोबर बेचने वाला कोई नहीं है जबकि इस योजना के तहत दर्जनों पशु पालकों का पंजीयन किया गया है इससे परेशान होकर स्व सहायता समूह के महिलाओं ने वर्मी कम्पोस्ट खाद बनाने का काम छोड़ दिया है गांव वालों का कहना है कि इस मामले में कलेक्टर को भी ध्यान देने की जरूरत है।राज्य स्तर के अधिकारियों द्वारा  जब भी जिले का दौरा किया जाता हैं लेकिन कमरीद कोसमन्दा जैसे बदहाल गोठान का निरीक्षण आखिर क्यों नही किया जाता और कहा जाता हैं कि राज्य के उच्चाधिकारियों का आकस्मिक निरीक्षण।जबकि पहले से ही सबको पता रहता हैं।जिले के मात्र दो चार गोठानो में ही उच्चधिकारियों का बार बार दौरा होता है। यहाँ गोठान की बदहाल स्थिति व व्यवस्था को नजर अंदाज किया जा रहा है सड़क में आये दिन मवेशी सड़क हादसे के शिकार हो रहे है जिसके कारण पशुओं की अकाल मौत हो रही हैं जिस पर सरकार की ओर से अभी तक कोई भी पहल नहीं कि गई हैं।वही जंगल मे मवेशियों को छोड़ने के नाम पर कुछ सरपंचों द्वारा राशनकार्ड हित ग्राहियों से पत्येक कार्ड पीछे दो किलो चावल की भी उगाही की शिकायत गांव वालों से मिल रही हैं।जिससे गांव के लोगो मे सरपंचों के प्रति रोष ब्याप्त है।

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