जन दर्शन में समस्याओं से परिचित होते अधिकारी सामान्य प्रकरणों का निपटारा या फाइल को गति देते देखे सुने जाते हैं। प्रशासनिक दृष्टिकोण से जन दर्शन को जन हित में एक सार्थक पहल कहा जा सकता है।

 




आचार्य दिग्विजय सिंह तोमर वरिष्ठ पत्रकार एवं रा.संवाद प्रतिनिधि मतदाता जागृति मंच छत्तीसगढ़ सुरगुज़ा।



  जन दर्शन की एक अच्छी पहल  -ए सी कक्ष में बैठे लोक सेवकों को उन ग्रमीण वनवासियों के पास भी पहुंचने हेतु कार्यक्रम बनाना चाहिए जो 50-100 किलोमीटर की दूरी तक पहुंच पाने में असमर्थ होते हैं। उन सुदूर क्षेत्रों में कैंप लगाकर पीड़ित पक्षों की समस्याओं का निदान करने का पुनीत कार्य भी प्रशासन को करना चाहिए। अधिकारी बने आदरणीय लोक सेवकों को विभाग में धूल खा रहे उन फाइलों का भी समय पर निपटारा करना-कराना चाहिए जो किसी लोभ-प्रलोभन के शिकार हो रहे हैं।


        *सामरी पाट ग्राम पंचायत बाटा के प्रसन्न नगेसिया जैसे* अनेक प्रकरणों में प्रगति आज दिनांक तक क्या हुई है! इसकी जानकारी सूचनातंत्र के माध्यम से प्रार्थी और पाठकों, आम जनता को मिलनी चाहिए। कर्तब्य परायणता की पारदर्शिता कौन सुनिचित करेगा जिला कलेक्टर या विभागीय मंत्री?


        *थाने में प्रथम सूचना रिपोर्ट लिखाने हेतु निर्धन कमजोर वर्गों से लेकर मध्यम वर्गीय व्यक्ति क्या कहता है इसे भी आम सभाओं में प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के सीधा प्रसारण की ब्यवस्था में सुनाया दिखाया जाना चाहिए*।


      सुरगुज़ा सम्भाग में माननीय मुख्यमंत्री की जन कल्याणकारी योजनाओं का लाभ हितग्राहियों को कितना मिल रहा है यह पेपर वर्क से प्रशासनिक अमला दिखा बजट का बन्दर बांट कर रहा है(?)  


         पर धौरपुर जनपद में *विशेष पिछड़ी कोरवा जन जाति के युवाओं को  मोटर ड्राविंग का प्रशिक्षण* छल धोखा फरेब गमन के पुख्ता प्रमाण को जांच के संवैधानिक दायरे में लाकर सब कुछ ठीक है का दस्तावेजी रिपोर्ट प्रशासन अपने पक्ष में ही करते-कराते दिख रहा है!


       जशपुर जिले के आदिवासी कल्याण विकास विभाग के मंत्री रहे *गणेश राम भगत* जी को उस वक्त आश्चर्य होता है जब सुरगुज़ा जिले से पीड़ित उनके पास उमीदें लगाए पहुंचता है। तब सहसा यह वाक्य निकल पड़ता है– *क्यों सुरगुज़ा में कोई नेता नहीं जो तुम लोग मेरे पास आये हो!*

 

      *शर्म उनको आती है जो शर्म हया के मर्यादाओं में जन्म लेते हैं*।

उनको क्या जिनकी जननियों ने रिश्वतें लेकर बेशर्मों-बेशर्मीयों को जन्म दिया हो!


     *कौन पिता किसका! यह प्रमाणित करना उन रिश्वतखोरों  के अपराधों को प्रमाणित करने जैसा कठिन काम है*।


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