रतनपुर की माटी से निजीकलकर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की कमान संभालने तक — ज़मीनी संघर्ष, जनसेवा और राजनीतिक सूझबूझ की आधी सदी
मुख्य बिंदु:
1 अक्टूबर 1976 को किसान परिवार में जन्मे श्याम बिहारी जायसवाल 1 अक्टूबर 2026 को पूरे कर रहे हैं जीवन के 50 वर्ष।
रसायन शास्त्र में स्नातकोत्तर (गोल्ड मेडलिस्ट) से लेकर पंचायत, विधानसभा और कैबिनेट मंत्री तक का प्रेरणादायी सफर।
अंचल में मेडिकल कॉलेज, नई रेल लाइन और मेगा स्वास्थ्य शिविरों से स्वास्थ्य व अधोसंरचना के क्षेत्र में लिखी विकास की नई इबारत।
जिला ब्यूरो चीफ बबलू जायसवाल
एमसीबी / चिरमिरी (विशेष संवाददाता)।
सादगी, सहजता और ज़मीनी सरोकारों से जुड़ी राजनीति का जब भी ज़िक्र होता है, तो छत्तीसगढ़ सरकार में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल का नाम अग्रिम पंक्ति में आता है। एक सामान्य कृषक परिवार के आंगन से निकलकर प्रदेश की सर्वोच्च नीति-निर्धारक कैबिनेट तक पहुंचने वाले श्याम बिहारी जायसवाल 1 अक्टूबर 2026 को जीवन के 50वें पड़ाव में प्रवेश कर रहे हैं। इन पांच दशकों की यात्रा केवल उम्र का आंकड़ा नहीं, बल्कि एक साधारण ग्रामीण युवक के असाधारण राजनीतिक और सामाजिक संकल्प की दास्तान है।
माटी की महक और शिक्षा में अव्वल: खेत से लेकर लैब तक का सफर
1 अक्टूबर 1976 को ग्राम रतनपुर में स्व. सूरजदीन जायसवाल एवं श्रीमती चंद्रवती जायसवाल के घर जन्मे श्याम बिहारी का बचपन ग्रामीण संघर्षों और खेती-किसानी के बीच बीता। पिता के साथ खेतों में पसीना बहाते हुए उन्होंने शिक्षा की लौ को कभी मंद नहीं पड़ने दिया। रतनपुर के सरकारी स्कूल से प्राथमिक शिक्षा पूरी करने के बाद वे खड़गवां और फिर चिरमिरी के दादू लाहिड़ी महाविद्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने विज्ञान संकाय में कदम रखा और रसायन शास्त्र (M.Sc. Chemistry) में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक (Gold Medal) हासिल कर यह साबित किया कि संसाधनों की कमी कभी प्रतिभा की राह में रोड़ा नहीं बन सकती।
पंचायत से विधानसभा: स्थानीय निकाय ने गढ़ी नेतृत्व की नींव
जायसवाल का सार्वजनिक जीवन किसी विरासत की देन नहीं, बल्कि धरातल से उभरा नेतृत्व है। वर्ष 2009 में उन्होंने स्थानीय निकाय चुनाव से राजनीति में कदम रखा और जनपद सदस्य चुने गए। 2009 से 2013 तक जनपद पंचायत खड़गवां के उपाध्यक्ष के रूप में उन्होंने ग्रामीण विकास और जनसमस्याओं को बहुत करीब से समझा।
उनकी इसी सक्रियता ने उन्हें 2013 में पहली बार मनेन्द्रगढ़ विधानसभा से विधायक बनाया। इसके बाद 2023 के विधानसभा चुनाव में जनता ने उन पर दोबारा भरोसा जताया और वे 11,880 मतों के भारी अंतर से विजयी होकर विधानसभा पहुंचे। उनके इस जनविश्वास और सांगठनिक अनुभव को देखते हुए मुख्यमंत्री ने उन्हें प्रदेश के सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण विभाग—लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण की कमान सौंपी।
संगठन के निष्ठावान सिपाही और रणनीतिकार
चुनावी राजनीति के साथ-साथ भाजपा संगठन में भी उनकी भूमिका अत्यंत प्रभावशाली रही है। भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष (2020-2022) के रूप में उन्होंने पूरे प्रदेश में किसानों के मुद्दों को पुरजोर तरीके से उठाया। इसके अलावा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य, कोरबा जिला संगठन प्रभारी सहित बिहार, असम और उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों तथा उपचुनावों में उन्होंने अपनी सांगठनिक और रणनीतिक क्षमता का लोहा मनवाया।
स्वास्थ्य क्रांति और अंचल का कायाकल्प: बड़े प्रोजेक्ट्स को दी रफ्तार
स्वास्थ्य मंत्री के रूप में श्याम बिहारी जायसवाल का विजन केवल फाइलों तक सीमित नहीं रहा। वे लगातार अस्पतालों के औचक निरीक्षण, व्यवस्थाओं के आधुनिकीकरण और डॉक्टरों की जवाबदेही तय करने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने ‘सेवा संकल्प अभियान’ के माध्यम से सुदूर वनांचल और ग्रामीण क्षेत्रों तक विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम पहुंचाकर गरीबों के निःशुल्क इलाज की नई परंपरा शुरू की।
अंचल के विकास में भी उनके प्रयासों से कई ऐतिहासिक सौगातें मिली हैं:
* स्वास्थ्य एवं शिक्षा: मनेन्द्रगढ़ में 323 करोड़ की लागत से शासकीय मेडिकल कॉलेज, खड़गवां में कृषि महाविद्यालय, चिरमिरी में पॉलिटेक्निक और नर्सिंग कॉलेज।
* कनेक्टिविटी व बुनियादी ढांचा: बहुप्रतीक्षित चिरमिरी-नागपुर हाल्ट नई रेल लाइन (लागत ₹601.90 करोड़), चिरमिरी-साजा पहाड़ मार्ग (₹47 करोड़ से अधिक) और अमृत जल मिशन (₹183 करोड़) जैसी महत्वाकांक्षी योजनाएं।
* अस्पतालों का उन्नयन: जिला और सामुदायिक अस्पतालों में आधुनिक डायलिसिस यूनिट, सीटी स्कैन, ट्रामा सेंटर और सुपर-स्पेशियलिटी सुविधाओं का विस्तार।
एक नजर में: 5 दशक का गौरवशाली सफर
| विवरण | तथ्य |
|---|---|
| जन्म एवं तिथि | 1 अक्टूबर 1976, ग्राम रतनपुर (एमसीबी) |
| माता-पिता | श्रीमती चंद्रवती जायसवाल एवं स्व. सूरजदीन जायसवाल |
| शिक्षा | एम.एससी. (रसायन शास्त्र), स्वर्ण पदक विजेता |
| राजनीतिक पदार्पण | 2009 (जनपद सदस्य, उपाध्यक्ष खड़गवां 2009–13) |
| विधायक कार्यकाल | प्रथम बार: 2013, द्वितीय बार: 2023 (मनेन्द्रगढ़) |
| सांगठनिक भूमिका | पूर्व प्रदेश अध्यक्ष - भाजपा किसान मोर्चा, जिला प्रभारी, कार्यसमिति सदस्य |
| वर्तमान दायित्व | स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री, छत्तीसगढ़ शासन |
जनता के ‘श्याम भैया’: सहजता ही सबसे बड़ी ताकत
सत्ता के शीर्ष गलियारों में पहुंचने के बाद भी श्याम बिहारी जायसवाल की पहचान एक सुलभ और संवेदनशील जननेता की है। आज भी क्षेत्र की जनता उन्हें अपना पारिवारिक सदस्य मानती है। अपने उद्बोधनों में अक्सर "तुहर लईका, तुहर दुआरी, तुहर कमियां श्याम बिहारी" कहकर लोगों के दिलों को छूने वाले जायसवाल ने राजनीति को जनसेवा का माध्यम बनाया है। 50 वर्ष पूरे होने पर उनके समर्थक, कार्यकर्ता और अंचलवासी उनके दीर्घायु और यशस्वी जीवन की कामना कर रहे हैं।

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