मातृभूमि की पुकार पर विदेश का ऐशो-आराम छोड़ा: चीन में साइंटिस्ट रहे डॉ. नीरज लौटे वतन, मनेंद्रगढ़ में ऐतिहासिक स्वागत

 



भारी-भरकम पैकेज त्यागकर अंबिकापुर विश्वविद्यालय में संभाला प्राध्यापक का दायित्व; पिता और देश की सेवा को चुना पहला लक्ष्य

• छत्तीसगढ़ योग आयोग अध्यक्ष संजय अग्रवाल बोले— 'डॉ. नीरज का फैसला युवाओं के लिए राष्ट्रभक्ति की अनुपम मिसाल'

• सुर संध्या और योग साधक सम्मेलन में गूंजे देशभक्ति के तराने; शहर के गणमान्य नागरिकों ने फूल-मालाओं से लादा 

जिला ब्यूरो चीफ बबलू जायसवाल 

मनेंद्रगढ़ (विशेष संवाददाता)।

विदेशी चकाचौंध, लाखों का पैकेज और वैज्ञानिक के रूप में सुरक्षित करियर को त्यागकर अपनी मिट्टी के प्रति निष्ठा निभाने का एक अद्भुत और भावुक कर देने वाला उदाहरण मनेंद्रगढ़ की धरती पर देखने को मिला है। चीन में प्रमुख वैज्ञानिक (साइंटिस्ट) के रूप में अपनी बौद्धिक क्षमता का लोहा मनवा चुके नगर के होनहार लाल डॉ. नीरज श्रीवास्तव ने स्वदेश लौटने का ऐतिहासिक फैसला लेकर हर किसी का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया है।

मातृभूमि के ऋण को चुकाने और अपने वयोवृद्ध पिता की सेवा करने के पावन संकल्प के साथ उन्होंने छत्तीसगढ़ के संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय, अंबिकापुर में प्राध्यापक का पदभार ग्रहण किया है। डॉ. नीरज के इस फैसले और स्वदेश वापसी के उपलक्ष्य में मनेंद्रगढ़ में आयोजित 'योग साधक सम्मेलन एवं सुर संध्या' का मंच एक भावुक और ऐतिहासिक अभिनंदन समारोह में तब्दील हो गया।

राज्यमंत्री संजय अग्रवाल ने सराहा: 'संस्कार और मिट्टी की खुशबू ने खींचा वतन'

समारोह के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ योग आयोग के अध्यक्ष (राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त) श्री संजय अग्रवाल ने डॉ. नीरज के त्याग और समर्पण को राष्ट्रीय गौरव बताते हुए कहा:

> "आज के दौर में जब हर युवा विदेश में बसने और भौतिक सुख-सुविधाओं की अंधी दौड़ में शामिल होने का सपना देखता है, उस दौर में डॉ. नीरज श्रीवास्तव का चीन जैसे देश में एक प्रतिष्ठित साइंटिस्ट का पद और बेहतरीन पैकेज छोड़कर भारत लौटना दिल को छू लेने वाला है। यह फैसला बिना पारिवारिक संस्कारों और राष्ट्रप्रेम के संभव नहीं हो सकता। इनके पूज्य पिता श्री मुन्नालाल श्रीवास्तव जी स्वयं आजीवन शिक्षा और योग साधना के प्रतीक रहे हैं। यह उनके नैतिक संस्कारों की ही विजय है कि उनका बेटा दुनिया की सबसे ऊंची सुख-सुविधाओं को छोड़कर अपनी जन्मभूमि और समाज की सेवा के लिए लौट आया।"

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पिता के सानिध्य और युवाओं के मार्गदर्शन का लिया संकल्प

नगर के सेवानिवृत्त वरिष्ठ प्राचार्य मुन्नालाल श्रीवास्तव के सुपुत्र डॉ. नीरज श्रीवास्तव का शुरू से ही लक्ष्य अपनी जड़ों से जुड़कर काम करने का रहा। चीन में शोध कार्य के दौरान अपार सफलताएं मिलने के बावजूद उनके मन में सदा यह विचार कौंधता रहा कि उनके ज्ञान, शोध और बौद्धिक क्षमता का वास्तविक लाभ उनके अपने वतन और राज्य के युवाओं को मिलना चाहिए। इसी पवित्र भाव के साथ उन्होंने संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय के विश्वविद्यालय शिक्षण विभाग (UTD) में बतौर प्राध्यापक शिक्षण एवं अनुसंधान की नई पारी शुरू की है, ताकि अंचल के होनहार विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का मार्गदर्शन मिल सके।

सुरों की त्रिवेणी में बही राष्ट्रप्रेम की धारा

योग समिति के तत्वावधान में आयोजित सुर संध्या कार्यक्रम में नगर के संगीत साधकों ने अपनी सुरीली प्रस्तुतियों से समां बांध दिया।

 सुप्रसिद्ध गायक मनजीत सिंह, गायिका व वार्ड पार्षद सुनैना विश्वकर्मा, युवा गायक अनमोल सलूजा, आकाश पोद्दार एवं हर्षलता खियानी ने एक से बढ़कर एक देशभक्ति व भावपूर्ण गीतों से उपस्थित जनसमुदाय को मंत्रमुग्ध कर दिया।

 साथ ही मुन्नी श्रीवास्तव, रिंकू देवनाथ, श्रुति पांडे, एम.एल. श्रीवास्तव, नवल किशोर सिंह एवं राजेश बुंदेला के गायन ने सांस्कृतिक संध्या को यादगार ऊंचाइयां प्रदान कीं।

विशिष्ट जनों और योग साधकों ने दी शुभकामनाएं

समारोह में डॉ. नीरज का अभिनंदन करने समाज के सभी वर्गों के लोग उमड़ पड़े। कार्यक्रम में मंच पर प्रमुख रूप से:

लायंस क्लब के सचिव व समाजसेवी डी.के. श्रीवास्तव, योग समिति संरक्षक मुन्नालाल श्रीवास्तव, वरिष्ठ योग जिला प्रशिक्षक सतीश उपाध्याय एवं प्रबुद्ध नागरिक पवन पोद्दार मंचासीन रहे।

इस गरिमामयी अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण निशि, रूपा पोद्दार, नीलू सिंह, पिंकी सलूजा, बलवीर कौर, अर्चना अग्रवाल, सुभाष अग्रवाल, विनोद कुमार सोनी, सुनील कुमार गुप्ता, विकास कुमार गोयल, विवेक कुमार तिवारी, भैरव प्रसाद केसरवानी, धर्मराज वर्मा, विष्णु प्रसाद कोरी, विश्वजीत पटेल, विमला यादव, नीरज अग्रवाल, प्रियंका अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में मातृशक्ति, योग साधक-साधिकाएं और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। उपस्थित सभी लोगों ने एक स्वर में कहा कि डॉ. नीरज श्रीवास्तव का यह कदम पूरे मनेंद्रगढ़ और छत्तीसगढ़ के लिए एक अविस्मरणीय गौरव है।

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