रघु साहू जिला ब्यूरो चीफ जांजगीर चांपा छत्तीसगढ़
जांजगीर-चांपा। जिले में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत कराए गए विकास कार्यों में उपयोग की गई सामग्री के भुगतान को लेकर लंबे समय से समस्या बनी हुई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार विभिन्न ग्राम पंचायतों में कराए गए कार्यों की सामग्री का लगभग 14 करोड़ 87 लाख रुपये का भुगतान लंबित बताया जा रहा है। भुगतान में देरी के कारण संबंधित पंचायतों और सामग्री उपलब्ध कराने वाले सप्लायरों के बीच आर्थिक लेन-देन प्रभावित होने की स्थिति सामने आई है।
मनरेगा के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में तालाब गहरीकरण, सड़क निर्माण, नाली निर्माण तथा अन्य विकास कार्य कराए जाते हैं। इन कार्यों के लिए पंचायत स्तर पर सीमेंट, रेत, गिट्टी, ईंट और अन्य निर्माण सामग्री की आवश्यकता होती है। सामग्री उपलब्ध कराने वाले लोगों को समय पर भुगतान नहीं मिलने से कई जगहों पर उधारी बढ़ने की बात सामने आई है।
पांच ब्लॉकों में करोड़ों की राशि लंबित
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक अकलतरा, बम्हनीडीह, बलौदा, नवागढ़ और पामगढ़ ब्लॉक में सामग्री भुगतान की बड़ी राशि बाकी है। आंकड़ों में वर्ष 2025-26 तथा 2026-27 से संबंधित लंबित राशि दर्ज है।
अकलतरा: 178.09 लाख रुपये
बम्हनीडीह: 315.39 लाख रुपये
बलौदा: 145.26 लाख रुपये
नवागढ़: 404.08 लाख रुपये
पामगढ़: 444.20 लाख रुपये
इन आंकड़ों को जोड़ने पर कुल लंबित राशि लगभग 14.87 करोड़ रुपये बताई गई है।
उधारी के सहारे काम चलाने की मजबूरी
पंचायत स्तर पर जुड़े लोगों का कहना है कि कई विकास कार्यों के लिए सामग्री पहले उधार में मंगाई गई थी। भुगतान लंबित रहने के कारण सामग्री आपूर्तिकर्ताओं की रकम फंस गई है। वहीं पंचायत प्रतिनिधियों पर भी भुगतान कराने का दबाव बना हुआ है। लंबे समय तक भुगतान नहीं होने से आगे नए कार्यों के लिए सामग्री जुटाना भी चुनौतीपूर्ण हो रहा है।
पामगढ़ क्षेत्र के एक सरपंच के अनुसार मनरेगा के तहत कराए गए कार्यों में बड़ी मात्रा में सामग्री का उपयोग हुआ, लेकिन संबंधित राशि का भुगतान समय पर नहीं हो सका। इससे पंचायत को सप्लायरों के प्रति जवाबदेही निभाने में परेशानी हो रही है।
भुगतान व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि सामग्री भुगतान की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद राशि समय पर खाते में नहीं पहुंचने से समस्या बढ़ रही है। उनका कहना है कि यदि लंबित भुगतान जल्द जारी किया जाता है तो पंचायतों के साथ-साथ स्थानीय सामग्री आपूर्तिकर्ताओं को भी राहत मिलेगी।
मनरेगा में मजदूरी भुगतान के साथ सामग्री मद की राशि भी महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में सामग्री भुगतान लंबे समय तक अटकने से ग्रामीण विकास कार्यों की गति प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही हैं,

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