हार्ट अटैक के संदिग्ध मरीजों का 10 मिनट में ईसीजी अनिवार्य, जिला चिकित्सा अधिकारी बोले— समय पर सही पहचान ही बचाएगी मरीज की जान
जिला ब्यूरो चीफ बबलू जायसवाल
मनेन्द्रगढ़
विश्व हृदय दिवस के अवसर पर मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को आपातकालीन स्थितियों के लिए और अधिक सक्षम बनाने हेतु विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. अविनाश खरे के कुशल मार्गदर्शन में जिले भर के चिकित्सा अधिकारियों को ईसीजी की सूक्ष्म बारीकियों और गंभीर हृदय रोगों की त्वरित पहचान के लिए विशेष ऑनलाइन प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
एनसीडी की जिला नोडल अधिकारी डॉ. नम्रता चक्रवर्ती के समन्वय में आयोजित इस सत्र में जिले के प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के चिकित्सकों की विशेषज्ञता को धार दी गई। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. अनुराग तिवारी (एमबीबीएस, डीएनबी जनरल मेडिसिन) ने व्यवहारिक
उदाहरणों के जरिए डॉक्टरों को ईसीजी रिपोर्ट के त्वरित विश्लेषण और आपातकालीन निर्णय लेने के तौर-तरीके सिखाए।
'गोल्डन आवर' में 10 मिनट का नियम तय
सीएमएचओ डॉ. अविनाश खरे ने जिले के चिकित्सकों को निर्देशित करते हुए कहा कि सीने में दर्द या असहजता की शिकायत लेकर आने वाले हर संदिग्ध मरीज का अस्पताल पहुंचने के 10 मिनट के भीतर अनिवार्य रूप से ईसीजी किया जाए। हृदय घात (हार्ट अटैक) के मामलों में 'गोल्डन आवर' का एक-एक मिनट जीवन रक्षक साबित होता है। रिपोर्ट की सही रीडिंग से न केवल स्थानीय स्तर पर तत्काल प्राथमिक उपचार शुरू हो सकेगा, बल्कि गंभीर स्थिति में मरीज को उच्च स्वास्थ्य केंद्र रेफर करने में भी देरी नहीं होगी।
साइलेंट हार्ट अटैक के असामान्य लक्षणों पर सतर्कता
प्रशिक्षण के दौरान विशेष रूप से यह तथ्य सामने रखा गया कि हार्ट अटैक के लक्षण हमेशा पारंपरिक सीने के दर्द जैसे नहीं होते। डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर से ग्रस्त मरीजों में अक्सर असामान्य लक्षण— जैसे पेट के ऊपरी हिस्से में तेज जलन, बेचैनी, घबराहट या उल्टी की शिकायत— देखने को मिलती है। डॉक्टरों को सलाह दी गई कि ऐसे मामलों को साधारण गैस्ट्रिक समस्या मानकर अनदेखा न करें और तुरंत ईसीजी कराएं।
स्वास्थ्य विभाग की जनता से अपील
सीएमएचओ एवं स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से भी अपील की है कि वे अपनी जीवनशैली को लेकर सचेत रहें। संतुलित खान-पान, नियमित व्यायाम, तंबाकू से दूरी तथा बीपी-शुगर की नियमित जांच से हृदय रोगों के खतरे को काफी हद तक टाला जा सकता है। अचानक पसीना आना, सांस फूलना, सीने में भारीपन या अत्यधिक कमजोरी महसूस होते ही घरेलू नुस्खों में समय गंवाए बिना तत्काल नजदीकी शासकीय अस्पताल पहुंचें।

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