सही लिखने वाले को शून्य, गलत जवाब पर बांटे नंबर... कॉपियां लहराकर बोले कांग्रेस नेता अशोक श्रीवास्तव व पूनम सिंह— 'यह मूल्यांकन नहीं, युवाओं के भविष्य का कत्ल है'

 


MCB में फूटा आक्रोश : कांग्रेस का दावा— 1:3 का नियम तोड़ 187 मेधावियों का हक मारा, अपात्र शिक्षकों से जंचवाई कॉपियां; फौरन इंटरव्यू रोकने की मांग

जिला ब्यूरो चीफ बबलू जायसवाल 

मनेंद्रगढ़

छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की कार्यप्रणाली एक बार फिर गहरे संदेह के घेरे में आ गई है। मुख्य परीक्षा 2024 की उत्तर-पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में पक्षपात और भारी गड़बड़ी के चौंकाने वाले प्रमाण सामने आए हैं। मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) जिला कांग्रेस कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में जिला अध्यक्ष अशोक श्रीवास्तव और जिला महामंत्री पूनम सिंह ने अभ्यर्थियों की जांची गई कॉपियों के पन्ने सार्वजनिक करते हुए आयोग और राज्य सरकार के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया।

नेताओं ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि आयोग ने नियमों को ताक पर रखकर चहेतों को फायदा पहुँचाया है और योग्य युवाओं के भविष्य पर डाका डाला है।

अशोक श्रीवास्तव (जिला कांग्रेस अध्यक्ष) ने कहा:

> "हमने साक्ष्यों के साथ यह साबित किया है कि सीजीपीएससी में किस कदर अंधेरगर्दी मची है। दो छात्रों ने बिल्कुल एक जैसा सही उत्तर लिखा, लेकिन एक को पूरे 2 में से 2 अंक दिए गए और दूसरे को शून्य थमा दिया गया। भक्तिन माता राजिम और होमरूल लीग जैसे प्रश्नों में गलत उत्तर देने वालों पर नंबरों की बरसात की गई और सही लिखने वालों के नंबर काट दिए गए। जब तक इस पूरे मूल्यांकन घोटाले का दूध का दूध और पानी का पानी नहीं हो जाता, तब तक वर्तमान इंटरव्यू प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए। हम युवाओं के हक की लड़ाई सड़क से लेकर विधानसभा तक पूरी ताकत से लड़ेंगे।"

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पूनम सिंह (जिला महामंत्री) ने कहा:

> "आयोग ने भर्ती नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई हैं। वर्ष 2025 में विज्ञापित 265 पदों के लिए 1:3 के फार्मूले के अनुसार 795 अभ्यर्थियों को इंटरव्यू में बुलाया जाना अनिवार्य था, लेकिन आयोग ने सिर्फ 608 को ही पात्र किया। आखिर वो 187 अभ्यर्थी कौन हैं और उन्हें न्यूनतम अंक का बहाना बनाकर किस आधार पर बाहर किया गया? जिन बच्चों के अंक कट-ऑफ में आ रहे हैं, उन्हें दरकिनार क्यों किया जा रहा है? हद तो यह है कि कॉलेज प्रोफेसरों के बजाय स्कूली शिक्षकों (एल.बी.) से कॉपियां जंचवाई गईं, जिससे परीक्षकों के नाम तक उजागर हो गए और परीक्षा की गोपनीयता तार-तार हो गई।"

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कॉपियों से खुली पोल : भास्कर पड़ताल के मुख्य बिंदु

  एक जैसा जवाब, फिर भी भेदभाव: प्रश्न क्रमांक 5(i) में दो अभ्यर्थियों के उत्तर बिल्कुल समान थे; एक को मिले 2/2, दूसरे को मिला 0।

  गलत उत्तर पर मेहरबानी: 'भक्तिन माता राजिम' प्रश्न पर सही उत्तर वाले को 8 में से 3.5 अंक मिले, जबकि गलत लिखने वाले को नियमविरुद्ध 1.5 अंक थमा दिए गए।

  होमरूल लीग प्रश्न में झोल: गलत तथ्य (1923 व स्वराज दल) लिखने वाले अभ्यर्थी को भी सही उत्तर लिखने वाले के बराबर 2.5 अंक बांट दिए गए।

कांग्रेस के 4 कड़े सवाल और प्रमुख मांगें:

  साक्षात्कार पर तुरंत रोक: जब तक मूल्यांकन की जांच पूरी न हो, तब तक इंटरव्यू स्थगित हों।

  कॉपियां हों सार्वजनिक: इंटरव्यू से पहले सभी अभ्यर्थियों की मूल्यांकित उत्तर-पुस्तिकाएं पोर्टल पर दिखाई जाएं।

  मॉडल आंसर व फ्री कॉपियां: मुख्य परीक्षा का मॉडल आंसर जारी किया जाए और गैर-चयनित सभी छात्रों को निशुल्क कॉपियां दी जाएं।

1:3 का नियम लागू हो: रिक्त पदों के मुकाबले पूरे 3 गुना अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाए। इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से

 पूर्व जनपद सदस्य रफीक मेमन, पूर्व सरपंच अमोल सिंह मरावी, राम अवतार सिंगरौल सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी उपस्थित रहे।)

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