उदयपुर के फतेहपुर में बाहरी लोगों के द्वारा सम्मलेन के बहाने ग्रामीणों को बरगलाने कर रहे प्रयास 2 अक्टूबर के सम्मेलन में बिगड़ सकती है कानून व्यवस्था,संक्रमण का भी खतरा

 


जावेद अख्तर सरगुजा जिला उदयपुर


सरगुजा जिला के उदयपुर के फतेहपुर में  लोगों के द्वारा सम्मेलन के बहाने ग्रामीणों को बरगलाने प्रयास हो रहा है।जबकि स्थानीय ग्रामीणों का सम्मेलन को लेकर कोई रुचि नहीं है,वह पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड जहां लोगों को नौकरी,मुआवजा के साथ उनका आजीविका चला रही है वहीं विभिन्न मदों में प्राप्त राजस्व का लाभ सरगुजा का हो रहा है जिसके कारण क्षेत्र का विकास भी हो रहा है।

स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ बाहरी लोगों के द्वारा गांव में भ्रम फैलाकर उकसाने का प्रयास किया जा रहा है।ग्रामीणों का कहना है कि उदयपुर फतेहपुर के मूलनिवासी और आदिवासी जो इस सम्मेलन का पूरे तरीके से विरोध कर रहे हैं वही उनका कहना है कि सम्मेलन के माध्यम से कुछ लोग अपने फायदे के लिए यह कार्यक्रम कर रहे है।ग्रामीणों का कहना है कि बाहरी लोगों के द्वारा अगर उनके साथ जबरदस्ती की गई तो कानून व्यवस्था की समस्या खड़ी हो सकती है। यही नहीं इस सम्मेलन में दिगर प्रांत के लोग भी शामिल होने जा रहे हैं जिससे कोरोना संक्रमण का भी खतरा हो सकता है।

बताया जा रहा है कि हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले 2 अक्टूबर गाँधी जयंती पर सुबह 11 बजे से ग्राम फतेहपुर में ग्रामसभाओं का सम्मलेन कराया जा रहा है।4 अक्टूबर को ग्राम फतेहपुर से रायपुर के लिए 10 दिवसीय पदयात्रा करने का भी कार्यक्रम है।इस सम्मेलन हेतु समिति द्वारा प्रशासन से किसी प्रकार की अनुमति नहीं ली गई है।इस सम्मेलन में भारी भीड़ एकत्रित कर शक्ति प्रदर्शन करने की मंशा है।चुकि समिति को सम्मेलन प्रशासन से परमिशन नहीं मिला है,अगर हजारों लोगों की भीड़ इकट्ठा कर सम्मेलन कराया गया तो प्रशासन इस पर बड़ी कार्रवाई भी कर सकता है,वहीं स्थानीय लोग जो इस सम्मेलन का विरोध कर रहे हैं उनके साथ भी झड़प की स्थिति बन सकती है।

जो बाहर से आकर उकसा रहे हैं वह ना तो मूल निवासी हैं ना आदिवासी-

2 अक्टूबर को फतेहपुर में ग्रामसभाओं का जो लोग बाहर से आकर सम्मलेन करा रहे है वह ना तो वहाँ के मूल निवासी हैं ना आदिवासी। ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ लोग अपना स्वार्थ साधने ऐसा कार्यक्रम समय-समय पर कराते रहते हैं और भ्रम की स्थिति निर्मित करा कर अपना हित साधने के बाद ग्रामीणों को छोड़ चले जाते हैं जिसके कारण बाद में ग्रामीणों का ही नुकसान होता है।

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