रघुसाहू रिपोर्टर जांजगीर चाम्पा छत्तीसगढ़
जांजगीर चाम्पा- जिला मुख्यालय के कचहरी चौक पर आज छत्तीसगढ़ जुझारू आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ,सहायिका कल्याण संघ के सभी पदाधिकारियों ,कार्यकर्ताओ सहित आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओ व सहायिकाओं द्वारा भारी भरकम भीड़ के साथ एकता का परिचय देते हुए अपनी मांगों व समस्याओं के लिए आंदोलन किया गया आंगन बाड़ी कार्यकर्ता व सहायिका कल्याण संघ के महिला पदाधिकारी द्वारा बताते हुए तीव्र अंदाज में कहा कि मेरा परिवार मेरी माँ आंगन बाड़ी में ही कार्यरत थी परन्तु शासन प्रशासन ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओ व सहायिकाओं की आज की स्थिति को देखते हुए आर्थिक सहयोग व वेतन पर आज तक ध्यान नही देने के कारण आज आंगन बाड़ी में कार्यरत महिलाओं व उनके परिवार कीआर्थिक स्थिति क्या हो सकती हैं यह सरकार अच्छी तरह से जान रही हैं। वही बार बार मीटिंग बैठक ट्रेनिंग व शासन प्रशासन की विभिन्न योजनाओं से सम्बंधित कार्य में भी हमारा सहयोग लिया जाता हैं उसके बावजूद भी अधिकारीओ व सुपरवाइजरो द्वारा हमे कई प्रकार से सुनाया जाता हैं। लेकिन अब ऐसा नही होगा हम चुप नही रहेंगे और जब तक हमारी समस्याओं का समाधान नहीं होता हैं हम आंदोलन करते रहेंगे।हमने ही वोट देकर सरकार बनाया है लेकिन आज सरकार को क्या हमारी समस्या नजर नही आ रही हैं।हमारी मेहनत के सामने हमारी तनख्वाह कुछ भी नही है। अब देखना ये होगा की आंगन बाड़ी में कार्यरत महिलाये अपनी आंदोलन की आवाज कहा तक पहुँचा पाती हैं और उनके इस आन्दोलन का क्या परिणाम सामने आता है क्योकि जिले के इस चौक में आये दिन किसी न किसी सम्बद्ध में आंदोलन होते ही रहते है हाल ही में खाद बीज कीटनाशक नकली कृषि समाग्री काला बाजारी सहित विभिन्न समस्याओं को लेकर भारी संख्या में भीड़ व उग्र आंदोलन हुआ था। जिसमें चार से पांच सौ पुलिस के अधिकारियों सहित जवानों की चप्पे चप्पे पर ड्यूटी लगाई गई थी। परन्तु आज यूरिया तीन से चार गुने अधिक दामो पर खुले आम बिक रही हैं। और यह कालाबाजारी शहर कस्बा के साथ साथ गांव गांव में हो रही हैं । परन्तु हासिल क्या हुआ आखिर मिला कुछ नही।
वैसे ही जिले के जर्जर सड़क सहित कई समस्याओं के सम्बंध में विगत कई सालों से आंदोलन ,हड़ताल, धरना प्रदर्शन, कलेक्ट्रेट घेराव जैसे आंदोलन होता रहा और जिले वासी गवाह हैं कि न तो आज तक ओवर ब्रिज बन पाई नही जिले की जान लेवा सड़क आखिर हर हाल में भुगतना तो आम जनता को ही पड़ता हैं।





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