विकसित भारत और जनकल्याणकारी योजनाओं के संदेश से महका परिसर; 39 प्रतिभागियों ने कैनवास पर उतारे सेवा और समर्पण के भाव
जिला ब्यूरो चीफ बबलू जायसवाल
मनेंद्रगढ़
छत्तीसगढ़ शासन द्वारा चलाए जा रहे माहव्यापी 'सेवा संकल्प अभियान' (17 सितंबर से 17 अक्टूबर) के तहत शासकीय विवेकानंद स्नातकोत्तर महाविद्यालय में बुधवार को रचनात्मकता और देशभक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। परिसर में आयोजित अंतर-महाविद्यालयीन 'रंगोली राष्ट्र प्रतियोगिता' में विद्यार्थियों ने चटक रंगों के जरिए विकसित भारत के विजन और राष्ट्र निर्माण के संकल्प को फर्श पर जीवंत कर दिया।
"राष्ट्रभाव जुड़ते ही कला बन जाती है देशभक्ति की अभिव्यक्ति"
कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती एवं छत्तीसगढ़ महतारी के तैलचित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्वलन के साथ हुई। विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए संस्था की प्राचार्य एवं नोडल अधिकारी प्रो. श्राबनी चक्रवर्ती ने कहा, "कलाकार की कल्पना अद्वितीय होती है। जब रंगों में राष्ट्रभक्ति का पुट मिल जाए, तो वह केवल एक पारंपरिक आकृति न रहकर देश के प्रति निष्ठा और समर्पण की सशक्त अभिव्यक्ति बन जाती है।"
मंच संचालन करते हुए रसायन शास्त्र विभागाध्यक्ष व कार्यक्रम प्रभारी डॉ. प्रभा राज ने विद्यार्थियों में ऊर्जा भरते हुए कहा कि संकल्पों को स्थायी पहचान देने के लिए परिश्रम की दरकार होती है। वहीं वाणिज्य विभागाध्यक्ष श्रीमती स्मृति अग्रवाल ने सभी प्रतिभागियों को प्रतियोगिता के तकनीकी नियमों से अवगत कराया।
कड़े मुकाबले में बीकॉम व एमएससी के दल चमके
'विकसित भारत का सपना' और 'जनकल्याणकारी योजनाएं' विषय पर केंद्रित इस स्पर्धा में 39 छात्र-छात्राओं ने अपनी कलात्मक प्रतिभा दिखाई। निर्णायक मंडल के कड़े मूल्यांकन के बाद परिणाम इस प्रकार रहे:
* प्रथम स्थान: संजना कश्यप, गीता जायसवाल एवं महिमा (संयुक्त दल - बीकॉम व एमएससी)
* द्वितीय स्थान: पी. विदया, बी. सुजाता एवं राधिका चौधरी (बीकॉम)
* तृतीय स्थान: दुर्गावती, मोनिका एवं सरस्वती (एमएससी रसायन शास्त्र)
परिणामों की आधिकारिक घोषणा राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस पुरुष इकाई) के कार्यक्रम अधिकारी श्री रणजीत मणि सतनामी ने की। कार्यक्रम के समापन पर प्राचार्य प्रो. चक्रवर्ती ने विजयी प्रतिभागियों को पुरस्कृत कर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। अंत में डॉ. प्रभा राज द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। इस दौरान आयोजन समिति के सभी सदस्य, प्राध्यापक और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।


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