गुलाब कमरो बोले- प्रचार के दीये जलाने से पहले जल-जंगल-जमीन और जनता की बदहाली का अंधेरा दूर करे सरकार
सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग पर उठाए तीखे सवाल; कहा- कर्मचारियों को मूल काम से हटाकर अभियानों में झोंका जा रहा
स्मार्ट मीटर, बेरोजगारी, स्वास्थ्य-शिक्षा और हसदेव-बस्तर के मुद्दों पर सरकार को घेरा; बताया ध्यान भटकाने की सियासत
बबलू जायसवाल, मनेंद्रगढ़/एमसीबी। छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस व सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में शुरू किए गए ‘सेवा संकल्प अभियान’ और घरों में ‘आशीर्वाद का दीया’ जलाने की अपील पर पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने तीखा सियासी हमला बोला है। कमरो ने सरकार की प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा कि साय सरकार की नीतियों में “बातों में तो उजाला नजर आता है, लेकिन जमीनी हकीकत में सिर्फ अंधेरा पसरा है।” उन्होंने तंज कसा कि इन दीयों की रोशनी में सरकार के विकास के दावे नहीं, बल्कि उसकी प्रशासनिक नाकामियां उजागर हो रही हैं।
प्रचार के उजाले से ढकी नहीं जा सकती बुनियादी विफलताएं: कमरो
पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने कहा कि आज प्रदेश का हर वर्ग परेशान है। शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है, अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाएं दम तोड़ रही हैं और शिक्षित युवा सड़कों पर बेरोजगारी का दंश झेल रहे हैं। कमरो ने कहा, “मुख्यमंत्री जी, प्रचार के दीये जलाने से पहले छत्तीसगढ़ के जल, जंगल, जमीन और बदहाल जनता के जीवन में छाया अंधेरा दूर कीजिए।” उन्होंने हसदेव, तमनार, बस्तर और तारा क्षेत्र के जंगलों की कटाई व पर्यावरणीय संकट का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि जल-जंगल-जमीन की रक्षा करने के बजाय सरकार पूंजीपतियों के हितों को साधने में लगी है, जिसे प्रदेश की जनता कतई बर्दाश्त नहीं करेगी।
शासकीय अमले को इवेंट मैनेजमेंट में झोंकने का आरोप
गुलाब कमरो ने दीप प्रज्ज्वलन कार्यक्रम को लेकर शासकीय तंत्र के इस्तेमाल पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि पंचायत और ग्रामीण विकास से जुड़े कर्मचारियों को उनके मूल दायित्वों—जैसे गांवों में रोजगार सृजन, सड़क, पानी और बुनियादी सुविधाओं के विकास—से हटाकर सरकार के प्रचारात्मक आयोजनों में झोंका जा रहा है। गांवों में काम ठप पड़ा है और सरकार कर्मचारियों से इवेंट करवा रही है।
कमरो ने आगे कहा कि प्रदेश में एक आदिवासी मुख्यमंत्री के आसीन होने के बावजूद विश्व आदिवासी दिवस पर राज्य स्तर पर कोई शासकीय गरिमामय आयोजन न होना और औपचारिक बधाई तक से परहेज करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण व उपेक्षापूर्ण है।
युवाओं के आक्रोश और Gen-Z प्रदर्शनों से घबराई सरकार: पूर्व विधायक
हाल ही में युवाओं और छात्र वर्ग द्वारा किए गए प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए कमरो ने निशाना साधा कि प्रदेश का युवा अब अपने अधिकारों को लेकर मुखर हो चुका है। स्मार्ट मीटर की मनमानी और रोजगार के अभाव से त्रस्त जनता जब जवाब मांग रही है, तो सरकार बैकफुट पर आकर असल मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए नए-नए प्रचार अभियानों की आड़ ले रही है।
कमरो ने दो टूक शब्दों में कहा कि प्रतीकात्मक दीयों से घरों का अंधेरा भले छंट जाए, लेकिन जनता के जीवन में वास्तविक उजाला तभी आएगा जब बेरोजगारों को रोजगार, ग्रामीणों को काम, मरीजों को मुकम्मल इलाज और उपभोक्ताओं को भारी-भरकम बिजली बिलों से राहत मिलेगी।

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